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स्वास्थ्य

मस्सों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है वायरस का असर

बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ते प्रदूषण और कमजोर इम्यूनिटी की वजह से त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक परेशानी है मस्से, जो शुरुआत में छोटे और सामान्य दाने जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन समय के साथ चेहरे, गर्दन, हाथों या पैरों की खूबसूरती को प्रभावित करने लगते हैं। कई लोग इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हें हटाने के लिए तरह-तरह के घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मस्से सिर्फ स्किन की सामान्य समस्या नहीं, बल्कि वायरल संक्रमण का संकेत भी हो सकते हैं।

गलत तरीके अपनाने से यह परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में जरूरी है कि मस्सों के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचाना जाए और सही इलाज की जानकारी ली जाए, ताकि ये समस्या बढ़ने से पहले ही नियंत्रित की जा सके।

डॉक्टरों के मुताबिक, मस्से मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी HPV की वजह से होते हैं। ये वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, उसकी इस्तेमाल की चीजें साझा करने या त्वचा पर मौजूद छोटे कट के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है।

कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। कई बार मस्से अपने आप खत्म हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये तेजी से बढ़कर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकते हैं।

दूसरों का तौलिया इस्तेमाल करना पड़ सकता है भारी :  मस्सों की समस्या स्किन एलर्जी और संक्रमण दोनों की वजह से हो सकती है। कई लोग अनजाने में दूसरों का तौलिया या निजी सामान इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में साफ-सफाई और निजी चीजों को शेयर न करना बेहद जरूरी माना जाता है।

कैसे पहचानें मस्सों के शुरुआती संकेत? :   विशेषज्ञों के अनुसार, मस्सों की पहचान करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता। त्वचा पर छोटे, उभरे हुए और खुरदुरे दाने दिखाई देना इसका सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है। इनका रंग हल्का भूरा, गुलाबी, सफेद या त्वचा जैसा हो सकता है। कई बार इन पर छोटे काले बिंदु भी नजर आते हैं। कुछ लोगों को खुजली, जलन या हल्की ब्लीडिंग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

बिना सलाह के घरेलू नुस्खे अपनाना हो सकता है नुकसानदायक :  कई लोग मस्सों को हटाने के लिए चूना, तेज केमिकल या घरेलू उपाय इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये तरीका कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर शुगर के मरीजों में इससे घाव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

होम्योपैथी में भी मौजूद हैं इलाज के विकल्प :   होम्योपैथी में Thuja Occidentalis, Causticum, Antimonium Crudum और Nitric Acid जैसी दवाइयों का इस्तेमाल मस्सों के इलाज में किया जाता है। इन दवाओं को मस्सों की स्थिति और लक्षणों के हिसाब से दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि होम्योपैथी सिर्फ बाहरी इलाज नहीं करती, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर भी ध्यान देती है।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है? :   अगर मस्सों में दर्द, खून आना या तेजी से फैलने जैसी समस्या दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार लोग इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज और सही देखभाल से मस्सों की समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

डिस्क्लेमरयह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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