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घबराहट, बेचैनी और थकान जैसी समस्याओं को न करें नजरअंदाज! ये हो सकते हैं थायरॉइड कैंसर के शुरुआती संकेत

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, घबराहट, एंग्जायटी और अचानक वजन बढ़ना या घटना जैसी समस्याएं लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही हैं। ज्यादातर लोग इन्हें तनाव, खराब खानपान या नींद की कमी का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कई बार शरीर के ये छोटे-छोटे संकेत थायरॉइड से जुड़ी गंभीर बीमारी की चेतावनी भी हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह समस्या थायरॉइड कैंसर का रूप भी ले सकती है।

हाल ही में अमेरिका की पूर्व अटॉर्नी जनरल Pam Bondi के थायरॉइड कैंसर से जूझने की खबर ने इस बीमारी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सर्जरी के बाद वह अब रिकवर कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और सही इलाज से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

छोटी सी ग्रंथि, लेकिन पूरे शरीर पर असर :  थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में मौजूद एक छोटी तितली जैसी ग्रंथि होती है। ये शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर का तापमान और एनर्जी लेवल को कंट्रोल करती है। जब इसमें गड़बड़ी आती है तो शरीर धीरे-धीरे कई संकेत देने लगता है।

हर एंग्जायटी मानसिक तनाव नहीं होती :  विशेषज्ञों के अनुसार घबराहट, बेचैनी और मूड स्विंग जैसी समस्याएं सिर्फ मानसिक तनाव की वजह से नहीं होतीं। कई बार हार्मोन असंतुलन के कारण भी ऐसा होता है। यही वजह है कि लोग सही बीमारी समझ नहीं पाते और इलाज में देरी हो जाती है।

इन संकेतों को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी :   अगर लंबे समय तक थकान बनी रहे, गले में गांठ या सूजन महसूस हो, आवाज भारी होने लगे, निगलने में परेशानी आए या दिल की धड़कन लगातार तेज रहे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। ये संकेत थायरॉइड कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।

गलत दवा से बढ़ सकती है परेशानी :  विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इंटरनेट देखकर या किसी की सलाह पर खुद से दवा शुरू करना खतरनाक हो सकता है। सही इलाज के लिए डॉक्टर थायरॉइड फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी जैसी जांच करवाने की सलाह देते हैं।

महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है खतरा :  डॉक्टरों के मुताबिक 30 से 60 साल की उम्र के लोगों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। महिलाओं में थायरॉइड कैंसर का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक माना जाता है। बढ़ता वजन, तनाव, खराब खानपान और परिवार में पहले किसी को यह बीमारी होना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

समय पर इलाज से बच सकती है जान :  अच्छी बात यह है कि थायरॉइड कैंसर के कई प्रकार समय रहते पकड़ में आ जाएं तो उनका इलाज संभव है। ज्यादातर मामलों में सर्जरी की जाती है और कुछ मरीजों को बाद में हार्मोन दवाएं लेनी पड़ती हैं। जरूरत पड़ने पर रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी भी दी जाती है।

खुद को सुरक्षित रखने के आसान तरीके :  संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर हेल्थ चेकअप थायरॉइड से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं। अगर लंबे समय से शरीर असामान्य संकेत दे रहा है, तो उसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज न करें।

 

डिस्क्लेमरयह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 

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