चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती कर एक बाउंसर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपित महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और आरोपित का नाम एक अन्य समान मामले में भी सामने आया है, ऐसे में उसे रिहा करना उचित नहीं होगा।
जस्टिस मनीषा बत्रा महिला प्रिया द्वारा दायर दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोपित ने खुद को निर्दाेष बताते हुए रिहाई की मांग की थी। अदालत ने 18 फरवरी को दायर याचिका पर सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि आरोपों की प्रकृति, संभावित सजा और समस्त परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता जमानत की हकदार नहीं है।
दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी
मामले के अनुसार, मृतक डिंपल एक अस्पताल में बाउंसर के रूप में कार्यरत था। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार, जो मृतक के पिता हैं, ने आरोप लगाया कि प्रिया नामक महिला, जो अंबाला में एक दुकान पर काम करती थी, इंस्टाग्राम के माध्यम से उसके बेटे के संपर्क में आई और बाद में उससे पैसे व महंगे उपहारों की मांग करने लगी। मांगें पूरी न होने पर वह उसे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देती थी।
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल चैट की प्रतियां एकत्र कीं, जिनमें आरोपित, मृतक, उसकी मां और बहन के बीच लगातार बातचीत सामने आई। यह भी पाया गया कि आरोपित तीन अलग-अलग इंस्टाग्राम आईडी का उपयोग कर रही थी। पूछताछ में आरोपित ने खुद को तलाकशुदा बताया और स्वीकार किया कि उसने मृतक से संबंध बनाए तथा उससे धन और उपहार मांगे।







