नई दिल्ली। भारत के एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, चंदा ने विडियोकॉन समूह को ₹300 करोड़ का कर्ज मंजूर करने के बदले में ₹64 करोड़ की रिश्वत ली। यह रकम उनके पति दीपक कोचर की कंपनी को दी गई थी, जो विडियोकॉन से जुड़ी थी।
मामले की जांच और फैसला
जांच एजेंसी ईडी ने कोचर दंपत्ति की ₹78 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने सही ठहराया। इसमें मुंबई के चर्चगेट स्थित उनका फ्लैट भी शामिल है, जिसे विडियोकॉन से जुड़ी कंपनियों के जरिए खरीदा गया था।
चंदा कोचर पर आरोप
चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। आईसीआईसीआई बैंक ने जब 27 अगस्त, 2009 को विडियोकॉन को ₹300 करोड़ दिए, तो अगले ही दिन विडियोकॉन की कंपनी एसईपीएल ने दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स को ₹64 करोड़ भेज दिए।
अब क्या होगा ?
चंदा और दीपक कोचर फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन उन पर मुकदमा चल रहा है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि उन्होंने धोखाधड़ी की और बैंक को नुकसान पहुंचाया। विडियोकॉन को दिया गया कर्ज बाद में डूब गया, जिससे आईसीआईसीआई बैंक को भारी नुकसान हुआ।







