काठमांडू। दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मनास्लु के कैंप में हिमस्खलन की चपेट में आने से भारतवंशी जर्मन पर्वतारोही और उनके नेपाली गाइड की मौत हो गई।
पर्वतारोहण अभियान का आयोजन करने वाली कंपनी ‘मकालू एडवेंचर’ के प्रबंध निदेशक मोहन लम्सल ने रविवार को बताया कि जर्मनी निवासी भारतवंशी ध्रुव ज्योति गुहा और गाइड फुरसेंबा शेरपा खराब मौसम के बावजूद कैंप दो से ऊपर के कैंप की ओर बढ़े थे। शनिवार रात हिमस्खलन की चपेट में आकर दोनों बर्फ में दब गए। दोनों पर्वतारोहियों का अभियान के आयोजकों से संपर्क टूटने के बाद बचाव दल को कैंप-3 भेजा गया। उनसे आखिरी बार शनिवार रात संपर्क हुआ था।
जब बचाव दल कैंप-3 पहुंचे तो धु्रव और फुरसेंबा के शव लगभग सात फीट बर्फ के नीचे मिले। लम्सल ने बताया कि कंपनी के छह अन्य पर्वतारोही, जिन्होंने कैंप-2 से वापस लौटने का फैसला किया था, सुरक्षित हैं, लेकिन खराब मौसम के बावजूद आगे बढ़ने वाले दोनों पर्वतारोही हादसे का शिकार हो गए। इस पर्वतारोहण सत्र में माउंट मनास्लु पर जान गंवाने वालों की संख्या चार हो गई है।
इससे पहले सिंगापुर के पर्वतारोही और एक नेपाली गाइड की पर्वत पर अलग-अलग घटनाओं में मौत हो चुकी है। माउंट मनास्लु की ऊंचाई समुद्र तल से 8,163 मीटर है। यह नेपाल के गोरखा जिले में है। संस्कृत शब्द मनास्लु का अर्थ है, आत्मा का पर्वत होता है।







