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डिफेंस सेक्टर में बंगाल की बड़ी छलांग, पांच परियोजनाओं का शिलान्यास, जानें क्या बोले रक्षा मंत्री?

कोलकाता । बंगाल में उद्योग और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने बड़े निवेश का खाका पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कोलकाता में करीब 3,400 करोड़ रुपये की लागत वाली रक्षा पीएसयू गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और यंत्र इंडिया लिमिटेड की पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमिपूजन और शिलान्यास किया।

समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत के भविष्य के संकल्प को और मजबूत करेंगी। पांचों परियोजनाएं ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन, आधुनिक तकनीक और शिपबिल्डिंग क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
हावड़ा के टिंबर पोंड शिपबिल्डिंग फैसिलिटी और दामोदर शिपबिल्डिंग फैसिलिटी की शुरुआत के साथ रायचक शिपयार्ड का भी भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा इशापुर स्थित मेटल एंड स्टील फैक्ट्री में यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की दो नई परियोजनाओं की शुरुआत हुई।
 रक्षा उत्पादन पर जोर :  रक्षा मंत्री ने कहा कि यंत्र इंडिया लिमिटेड उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्था के रूप में उभर रही है। इशापुर के मेटल एंड स्टील फैक्ट्री में शुरू की गई परियोजनाओं से उन्नत हथियार प्रणालियों के महत्वपूर्ण रणनीतिक घटकों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी। राजनाथ के अनुसार, 31 अक्टूबर 2021 को स्थापना के बाद कम समय में ही (वाईआइएल) ने तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करते हुए उल्लेखनीय प्रगति की है।

पारंपरिक उत्पादन के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास पर भी कंपनी निवेश कर रही है। पिछले जनवरी से इशापुर में (वाईआइएल) की ओर से 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके माध्यम से पुराने ढांचे का आधुनिकीकरण, इंडस्ट्री 4.0 की क्षमता विकसित करने और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग का ढांचा तैयार करने का काम चल रहा है।

दुनिया के सामने आई भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली की क्षमता  :  राजनाथ ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और ‘आपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली की क्षमता दुनिया के सामने आई है। आने वाले समय में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र के साझेदारों को साथ लेकर काम किया जाएगा। स्वदेशी तकनीक और स्वदेशी प्लेटफार्मों के जरिए सशस्त्र बलों को और मजबूत करने का लक्ष्य है।
शिपबिल्डिंग में भारत के लिए बड़ा अवसर:  शिपबिल्डिंग क्षेत्र में ‘कैपेसिटी पैराडाक्स’ का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया में जहाजों की मांग लगातार बढ़ रही है। व्यापारिक कार्गो जहाज, तेल टैंकर, लाजिस्टिक जहाज, फिशिंग वेसल, प्रदूषण नियंत्रण पोत और आफशोर प्लेटफार्म समेत विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ रही है। समुद्री व्यापार के विस्तार, नौसैनिक शक्ति में वृद्धि और समुद्री सुरक्षा की नई चुनौतियों से भी जहाजों की जरूरत बढ़ी है।

वहीं ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड और फ्रांस जैसे पारंपरिक जहाज निर्माता देशों में श्रम आधारित शिपबिल्डिंग की लागत बढ़ने और कुशल श्रम की कमी के कारण इस क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। राजनाथ ने इसे भारत के लिए बड़ा अवसर बताया।

उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल कुशल मानव संसाधन, मजबूत स्टील उद्योग, बड़ा एमएसएमई आधार और नई तकनीक अपनाने की क्षमता है। यदि देश शिपबिल्डिंग की उत्पादन क्षमता को आधुनिक बनाकर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है तो भारत दुनिया का अगला बड़ा शिपबिल्डिंग हब बन सकता है।

बंगाल में औद्योगिक पुनर्जागरण का दावा :  राजनाथ सिंह ने बंगाल के औद्योगिक इतिहास और संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के औद्योगिक विकास में बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और राज्य अब नए सिरे से औद्योगिक पुनर्जागरण की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, राज्य में शुरू की जा रही परियोजनाओं से केवल रक्षा उत्पादन नहीं बढ़ेगा, बल्कि नए उद्योग विकसित होंगे और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

करीब 3,400 करोड़ रुपये के निवेश वाली पांच परियोजनाओं में जीआरएसई की रायचक, कोलाघाट और तमलुक में शिपबिल्डिंग तथा संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा (वाईआइएल) के 3,000 टन क्षमता वाले हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट का भी शिलान्यास किया गया। राजनाथ ने इन परियोजनाओं को देश के रक्षा उत्पादन, उन्नत विनिर्माण और शिपबिल्डिंग क्षेत्र के लिए नए अवसरों की शुरुआत बताया।

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