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जोजिला सुरंग कितनी खास? ब्लास्टिंग का आखिर राउंड पूरा, अब मिली अभेद्य सुरक्षा

”लद्दाख को हर मौसम में कश्मीर और शेष भारत से जोड़ने वाली सामरिक रूप से अहम जोजिला सुरंग के अंदर आखिरी चट्टानी दीवार को ब्लास्ट के जरिए सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया। इसे इंजीनियरिंग की भाषा में ब्रेकथ्रू कहा जाता है, जिसके गवाह खुद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बने। इस सफलता के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच निर्बाध और सुरक्षित संपर्क बहाल रखने के लिए निर्माण कार्य अगले चरण में पहुंच गया। ”

नई दिल्ली। भारत के अहम जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट में मंगलवार (9 जून) को एक बड़ा पड़ाव आया। जोजिला दर्रे के ठीक नीचे स्थित निर्माणाधीन इस सुरंग में अहम ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में कारगिल की तरफ खुलने वाले इस सुरंग के हिस्से पर ब्लास्टिंग (धमाकों) का आखिर राउंड पूरा कर लिया गया। यानी सुरंग से आखिरी ब्लॉक हटने के बाद अब जोजिला सुरंग का निर्माण और तेज होते हुए अपने अंतिम चरण तक पहुंच गया है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जोजिला दर्रे पर बन रही इस सुरंग का इतिहास क्या है? इसे बनाने की जरूरत क्यों महसूस की गई? सुरंग कहां से कहां तक स्थित है? इसे बनाने में कितना खर्च आया है? इसके अलावा इस सुरंग की खास बातें क्या हैं? साथ ही कारगिल युद्ध से जुड़ी इसकी कहानी क्या है? आइये जानते हैं…

जोजिला दर्रे पर बन रही इस सुरंग का इतिहास क्या है? : जोजिला दर्रे पर बन रही इस अहम सुरंग के निर्माण का इतिहास करीब एक दशक पुराना है। यूं तो इसका अधिकतर काम मोदी सरकार में ही हुआ है, लेकिन इसकी योजना को आधिकारिक तौर पर मंजूरी 2013 में ही मिल गई थी।

मेघा इंजीनियरिंग ने 1 अक्टूबर 2020 से परियोजना पर काम शुरू किया और 14 अक्तूबर 2020 को पहली ब्लास्टिंग (विस्फोट) की गई। हिमालय के बेहद नाजुक भूविज्ञान, भूस्खलन के खतरे और जमा देने वाले तापमान (शून्य से 35 डिग्री नीचे तक) जैसी विषम परिस्थितियों से जूझते हुए इंजीनियरों ने काम जारी रखा। आखिरकार अब इस सुरंग का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

सुरंग कहां से कहां तक स्थित है? :  जोजिला सुरंग जम्मू और कश्मीर में सोनमर्ग के पास बालटाल से लेकर लद्दाख में द्रास के पास मीनमर्ग तक स्थित है। यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-1 (एनएच-1) पर जोजिला दर्रे के ठीक नीचे बनाई जा रही है। 13.15 किलोमीटर लंबी यह महत्वपूर्ण सुरंग सीधे तौर पर कश्मीर घाटी को लद्दाख क्षेत्र से जोड़ती है।

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