नई दिल्ली। विज्ञानी दुनिया का पहला ऐसा डस्टबिन बनाने के करीब पहुंच गए हैं, जहां परमाणु कचरा डाला जाएगा और फिर उसे लगभग एक लाख वर्षों के लिए सील कर दिया जाएगा। इस अवधि में क्षरण होकर रेडियोएक्टिव पदार्थ लगभग उसी स्थिति में पहुंच जाएगा, जिस स्थिति में जमीन के अंदर मौजूद प्राकृतिक यूरेनियम अयस्क होता है। यह परमाणु डस्टबिन दक्षिण-पश्चिम फिनलैंड के यूराजोकी स्थित जंगलों में जमीन से 433 मीटर की गहराई में बनाया गया है। यहां अरबों वर्ष पुरानी चट्टानों में सुरंगें बनाकर रास्ता बनाया गया है। इस डस्टबिन में दशकों से परमाणु बिजली बनाने के बाद बचे हुए रेडियोएक्टिव कचरे को दफनाने की तैयारी है।
कहां से आता है परमाणु कचरा
हर परमाणु संयंत्र से ऐसा कचरा निकलता है जो हजारों वर्षों तक रेडियोएक्टिव बना रहता है। पिछली सदी के छठे दशक में जब परमाणु संयंत्र शुरू हुए थे, तब से अलग-अलग देश परमाणु कचरे को ठिकाने लगाने की समस्या से जूझ रहे हैं।
अब तक इस कचरे का अधिकतर हिस्सा अस्थायी तौर पर बने पानी के कुंडों में ठंडा होने के लिए रखा जाता रहा है, लेकिन यह समस्या का अस्थायी हल है।
फिनलैंड करने जा रहा स्थायी समाधान
1.9 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में सुरंगें बनाकर तैयार किया गया ‘ओनकॉलो’ दुनिया का पहला ऐसा स्थायी डस्टबिन बनने जा रहा है, जहां परमाणु कचरे को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। फिनलैंड की परमाणु सुरक्षा एजेंसी इस महीने इसे अंतिम मंजूरी देने वाली है, जिसके बाद इसके संचालन का लाइसेंस जारी किया जा सकेगा।
परमाणु संयंत्र संचालित करने वाली कंपनी टीवीओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फिलिप बोर्डारियर ने ‘साइंस अलर्ट न्यूज’ को बताया, “उम्मीद है हम इस वर्ष के आखिर तक या अगले वर्ष की शुरुआत में यहां काम शुरू कर देंगे।”
ऐसे किया जाएगा सुरक्षित
जमीन के ऊपर परमाणु कचरे की छड़ों को तांबे के बने मोटे और जंगरोधी डिब्बों में बंद किया जाएगा। इसके बाद इन डिब्बों को 433 मीटर की गहराई तक उतारकर सुरंग के फर्श में खोदे गए छेदों के अंदर डाला जाएगा। इन छेदों को ‘बेंटोनाइट’ नामक चिकनी मिट्टी से भर दिया जाएगा।







