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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : हिंदू विधवा बहू को ससुर की संपत्ति से भरण पोषण का अधिकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू विधवा बहू को ससुर की संपत्ति से भरण पोषण पाने के अधिकार पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि हिंदू विधवा बहू अपने ससुर की संपत्ति से भरण पोषण पाने की अधिकारी है, चाहें वह ससुर के जीवित रहते विधवा हो गई हो या फिर ससुर की मृत्यु के बाद विधवा हुई हो।

शीर्ष अदालत ने हिंदू दत्तक एवं भरण पोषण कानून के प्रविधानों को स्पष्ट करते हुए यह फैसला दिया है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल विभिन्न अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि हाई कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है और उसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।

शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा है कि हिंदू दत्तक एवं भरण पोषण कानून 1956 की धारा 21 में जो आश्रितों की परिभाषा दी गई है, वह एकदम स्पष्ट है। उसमें कहा गया है कि पुत्र की विधवा जो अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है,, जिसने दूसरी शादी न की हो और जो अपने पति की संपत्ति से अथवा अपने बेटे या बेटी की संपत्ति से भरण पोषण में असमर्थ है, वो ससुर की संपत्ति से भरण पोषण पाने की अधिकारी है।

कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रविधान बिल्कुल स्पष्ट है। उसमें पुत्र की विधवा को आश्रित माना गया है, जो अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है। कोर्ट ने कहा कि कानून की धारा 22 में आश्रितों को भरण पोषण देने की बात कही गई है। इसमें मृत हिंदू व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकार प्राप्त करने वालों की जिम्मेदारी है कि वह मृतक के आश्रितों का मृतक की संपत्ति से भरण पोषण करे।

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