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भौम प्रदोष व्रत : भगवान शिव और माता पार्वती की करें आराधना, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Bhaum Pradosh Vrat: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व बताया गया है। यह अत्यंत पवित्र व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

मंगलवार यानी 2 दिसंबर को भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। हर माह के कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत किया जाता है। द्वादशी तिथि 2 दिसंबर को दोपहर बाद 3 बजकर 58 मिनट तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जायेगी, जो 3 दिसंबर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगी, लेकिन प्रदोष व्रत उसी दिन किया जाता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि के समय प्रदोष काल पड़ रहा हो। प्रदोष काल रात्रि के प्रथम प्रहर को, यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद के समय को कहा जाता है और 3 दिसंबर के दिन प्रदोष काल के समय त्रयोदशी तिथि नहीं रहेगी। अतः प्रदोष व्रत 2 दिसंबर के ही दिन किया जायेगा। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है तो भौम प्रदोष कहलाता है और भौम प्रदोष व्रत ऋण से मुक्ति के लिये किया जाता है। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि ।

भौम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के दिन सुबह व्रत का संकल्प लेने के बाद शाम के समय प्रदोष काल में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:13 AM से 06:04 AM तक
  • प्रातः संध्या- 05:38 AM से 06:56 AM तक

प्रदोष काल की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

  • गोधूलि मुहूर्त- 05:57 PM से 06:23 PM
  • सायाह्न संध्या- 06:00 PM से 07:17 PM तक

प्रदोष व्रत पूजा विधि- भौम प्रदोष व्रत के दिन प्रात:काल उठकर आपको स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद आपको पूजा स्थल को भी स्वच्छ करना चाहिए और वहां गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

पूरा दिन भर व्रत रखने के बाद प्रदोष काल में आपको विधिपूर्वक शिव जी की पूजा करनी चाहिए। शाम की पूजा के दौरान शिव जी को बेलपत्र, फल, फूल आदि आपको अर्पित करने चाहिए। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ और भगवान शिव के मंत्रों का जप करें। भोग स्वरूप शिव जी को तिल के लड्डू या फिर मालपुआ आप अर्पित कर सकते हैं।

अंत में शिव जी और माता पार्वती की आरती का पाठ आपको करना चाहिए। इसके बाद घर के लोगों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए और स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत का पारण करना चाहिए। विधिपूर्वक व्रत रखने और शिव जी की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्त आपको होती है। साथ ही भौम प्रदोष व्रत करने सके हर प्रकार के ऋण से आप मुक्त होते हैं।

 

डिस्क्लेमर: उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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