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कोरबा

कोरबा में आदिमानव, इस गुफा में मिली निशानियां, शैलचित्र और पाषाणकालीन उपकरण मिले, दिखा इतिहास

कोरबा। जिले में आदिमानवों से जुड़ी निशानियां मिली हैं। शहर से 24 किलोमीटर दूर आदिमानवों के एक ऐसे प्राचीन ठिकाने का पता चला है, जो लगभग 15-20 हजार साल हो सकते हैं। घने जंगल के भीतर छिपी इस रहस्यमयी गुफा में आदिमानव द्वारा बनाए गए शैलचित्र और पाषाणकालीन औजार मिले हैं, जो उस काल के मानव के जीवनशैली और कला को उजागर करते हैं।
‎‎पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्रिय ने एक बातचीत के दौरान बताया कि यह खोज विभाग के एक अभियान के दौरान हुई। टीम जब भालमाड़ा पहाड़ की तराई में दुर्गम रास्ते से गुजर रही थी, तभी उनकी नजर इस विशाल गुफा पर पड़ी। गुफा के भीतर प्रवेश करते ही शोधकर्ताओं को आदिमानव के रहने के पुख्ता प्रमाण मिले, जिनमें स्पष्ट रूप से उकेरे गए शैलचित्र और हस्तनिर्मित पाषाणकालीन उपकरण शामिल थे।
उन्होंने बताया कि ये उपकरण उस समय आदिमानव द्वारा शिकार और दैनिक जीवन में उपयोग किए जाते रहे होंगे। ‎‎पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा हजारों साल पहले आदिमानव का आश्रय स्थल रही होगी। बाद के समय में जब मानव बस्तियां विकसित हुईं और आसपास के क्षेत्रों में गांव बसे, तो इस गुफा को ‘भालमाड़ा गुफा’ के नाम से जाना जाने लगा। स्थानीय किंवदंतियों और नाम के पीछे का कारण यह था कि इस गुफा में भालुओं का वास होता था। ‎‎आज भी यह गुफा स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र है। गुफा के भीतर ग्रामीण मनसा माता की पूजा करते हैं, जो प्राचीन और आधुनिक मान्यताओं के अनूठे संगम को दर्शाता है।
हरि सिंह क्षत्रिय ने आगे कहा कि आदिमानव के युग से लेकर वर्तमान तक, यह गुफा मानव और प्रकृति के रिश्तों की एक लंबी कहानी कहती है। पुरातत्व विभाग ने इस गुफा को संरक्षित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्राचार कर दिया है । उम्मीद है जल्द ही इसे एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल घोषित किया जाएगा। इस खोज से न केवल छत्तीसगढ़ के अतीत के कई अनसुलझे रहस्य खुलेंगे बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन और पुरातात्विक शोध के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जो राज्य के गौरव को और बढ़ाएगा।
सभ्यता को प्रदर्शित कर रहे हैं शैलचित्र : प्राचीन काल में आदिमानव इसी तरह की गुफाओं में शरण लेते थे। जिस गुफा में वो निवास करते थे, वहां अपनी मौजूदगी का प्रमाण छोड़ते थे। इसलिए शैलचित्रों का विकास मानव सभ्यता के इतिहास से जुड़ा होना माना जाता है। पूर्व में मानव अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शैल या चट्टानों पर चित्र उकेरते थे। तब उसके पास लिखने के लिए कोई लिपि नहीं थी।

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