रांची। झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध और रंगदारी नेटवर्क के खिलाफ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और रांची पुलिस ने संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। जांच के दौरान पुलिस को प्रिंस खान गिरोह के संचालन और उसके डिजिटल नेटवर्क को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रिंस खान पाकिस्तान में बैठकर खुद मोबाइल फोन से धमकी भरे वीडियो बनाता है, लेकिन उन्हें सीधे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड नहीं करता। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्रिंस खान को इस बात की जानकारी है कि यदि वह खुद सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करेगा तो तकनीकी जांच के माध्यम से उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। इसी कारण वह वीडियो रिकॉर्ड कर अपने विश्वस्त सहयोगियों और गिरोह के सदस्यों को भेजता है। इसके बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल कर उन वीडियो को सार्वजनिक करते हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वीडियो अपलोड होने के बाद जिन मोबाइल नंबरों या सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। इसका उद्देश्य पुलिस को वीडियो पोस्ट करने वाले व्यक्तियों तक पहुंचने से रोकना होता है। हालांकि तकनीकी और अन्य सूचना के आधार पर पुलिस को ऐसे कुछ लोगों के नाम मिले हैं, जो लंबे समय से गिरोह के लिए वीडियो अपलोड करने और डिजिटल प्रचार-प्रसार का काम कर रहे हैं। पुलिस इनकी भूमिका की गहन जांच कर रही है। राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए एटीएस और रांची पुलिस ने व्यापक रणनीति बनाई है। सूत्रों के अनुसार इस बार कार्रवाई केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और सहयोगियों की भी गहन जांच की जा रही है।







