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ईरान पर हमले का सातवां दिन: मरने वालों की संख्या 1,332 के पार पहुंची, क्या यह पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा संकट?

नई दिल्ली। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर छेड़े गए युद्ध के सातवें दिन हवाई हमले काफी तेज हो गए हैं। यह सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे आक्रामक और विनाशकारी चरण में प्रवेश कर चुका है जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक संपत्तियों को भी व्यापक स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। आइए इस युद्ध के ताजा जमीनी हालात, आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण, क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य के आउटलुक को सवाल-जवाब के जरिए विस्तार से समझते हैं।

ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों पर हवाई हमलों की एक नई और भयंकर लहर शुरू हो गई है। तेहरान विश्वविद्यालय के आसपास और आवासीय क्षेत्रों सहित कई स्थानों पर रात भर बड़े विस्फोट हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में बमबारी पहले के दिनों के मुकाबले कहीं अधिक तीव्र रही है। इसके अलावा, शिराज, इस्फ़हान और मिसाइल ठिकानों वाले करमनशाह में भी भारी विस्फोटों की सूचना मिली है। शिराज के जीबाशहर इलाके में हुए एक बड़े हमले में 20 लोगों की जान चली गई और 30 अन्य घायल हो गए।

गठबंधन सेनाओं ने ईरान के शासन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए युद्ध के एक नए चरण की शुरुआत की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान के भीतर गहराई में स्थित बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स को नष्ट करने के लिए दर्जनों 2,000 पाउंड के “पेनिट्रेटर” बम गिराए हैं। अमेरिका ने ईरान की ‘स्पेस कमांड’ के समकक्ष ठिकानों पर भी सटीक हमला किया है ताकि उनकी क्षमता को कमजोर किया जा सके। इसके समानांतर, इजराइल की वायु सेना ने 6 ईरानी मिसाइल लॉन्चर्स और तीन उन्नत रक्षा प्रणालियों को नष्ट करने का दावा किया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि बमबारी में भारी वृद्धि होने वाली है, जिसके तहत आगे “अधिक फाइटर स्क्वाड्रन” और “अधिक बॉम्बर पल्स” का इस्तेमाल किया जाएगा।

अब तक जान-माल का कितना नुकसान हुआ है?

ईरान में मानवीय संकट के आंकड़े चिंताजनक हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, अब तक मरने वालों की कुल संख्या 1,332 के पार पहुँच गई है। सबसे दुखद यह है कि इनमें 181 बच्चे शामिल हैं। यूनिसेफ के अनुसार, 175 बच्चे युद्ध के पहले दिन मीनाब में एक लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए थे। पूरे देश में 3,643 नागरिक स्थल प्रभावित हुए हैं, जिनमें 3,090 घर, 528 वाणिज्यिक केंद्र और 14 चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। दूसरी ओर, इजराइल में अब तक 11 लोगों की मौत हुई है और शनिवार से अब तक 1,600 से अधिक लोगों का अस्पतालों में इलाज किया गया है।

क्या अन्य देश भी इस संघर्ष के प्रभाव में आ रहे हैं?

जी हां, इस युद्ध का दायरा पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों तक फैल रहा है। बहरीन के रक्षा बल ने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने क्षेत्र को निशाना बनाने वाले 78 ईरानी मिसाइलों और 143 ड्रोन्स को नष्ट कर दिया है। इसे बहरीन ने ईरान का धोखेबाज हमला करार दिया है।

क्या अमेरिका जमीनी सेना उतारेगा और ईरान की क्या तैयारी है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सेना भेजने की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह समय की बर्बादी” होगी क्योंकि ईरान अपनी नौसेना सहित “सब कुछ खो चुका है”। इसके विपरीत, ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि वह आने वाले दिनों में अपने हमलों का और विस्तार करेगी। शीर्ष ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे अमेरिकी जमीनी हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे वाशिंगटन के लिए “एक बड़ी आपदा” बताया है।

यह युद्ध अब एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इस्राइल के आक्रामक हवाई हमलों के कारण नागरिक हताहतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं का मानना है कि मीनाब में स्कूल पर हुए हमले के लिए संभवतः अमेरिकी बल जिम्मेदार थे। यदि जांच में इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह मध्य पूर्व के युद्धों में नागरिक हताहतों के सबसे खराब मामलों में से एक होगा और इसे युद्ध अपराध माना जाएगा।

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