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ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का नरेंद्र मोदी ने किया दौरा, इंस्टा स्टोरी भी डाली, लिखा ‘इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय!

जकार्ता/योग्याकार्ता। PM नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने करीब 1000 वर्ष पुराने इस मंदिर के संरक्षण और पुनरुद्धार परियोजना की शुरुआत की। इससे एक दिन पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने इस मंदिर को भारत और इंडोनेशिया के बीच एक हजार वर्षों से चले आ रहे गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का ‘एक और शानदार प्रमाण’ बताया था।

 

भारत ने पिछले कुछ सालों में कई देशों में मौजूद सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में मदद की है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं:

2014: वियतनाम के माई सोन मंदिर परिसर का संरक्षण

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2014 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल माई सोन सैंक्चुअरी (My Son Sanctuary) के संरक्षण का कार्य पूरा किया। यह दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे महत्वपूर्ण शैव मंदिर परिसरों में से एक है और प्राचीन चंपा साम्राज्य का प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा है।

2015: श्रीलंका के थिरुकेथीश्वरम मंदिर का जीर्णोद्धार

वर्ष 2015 में भारत ने श्रीलंका के ऐतिहासिक थिरुकेथीश्वरम मंदिर के पुनरुद्धार में सहयोग दिया। भारत सरकार ने जुलाई 2015 में एक समझौता किया, जिसके तहत 326 मिलियन श्रीलंकाई रुपये की अनुदान सहायता दी गई। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित श्रीलंका के पांच प्राचीन पंच ईश्वरम मंदिरों में से एक है।

2017: म्यांमार के बागान स्मारकों का पुनर्निर्माण

2017 में भारत ने यूनेस्को की विश्व धरोहर बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों के संरक्षण के लिए समझौता किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यहां 12 ऐतिहासिक पैगोडा का पुनरुद्धार किया और ऐतिहासिक आनंद मंदिर का संरक्षण कार्य भी पूरा किया।

2017: नेपाल के 28 सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण सहायता के तहत 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। इनमें ऐतिहासिक सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुढ़ानीलकंठ मंदिर धर्मशाला जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल शामिल हैं।

2019: बहरीन के 200 साल पुराने श्रीनाथजी मंदिर का पुनर्विकास

2019 में बहरीन की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राजधानी मनामा में करीब 42 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत से पुनर्विकसित 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) मंदिर का उद्घाटन किया। यह खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है।

2020: बांग्लादेश के मंदिरों का पुनर्निर्माण

वर्ष 2020 में भारत सरकार की अनुदान सहायता से बांग्लादेश के नाटोर में लगभग 300 वर्ष पुराने जॉय काली माता मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया। इसके अलावा आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के संरक्षण में भी भारत ने सहयोग दिया, जिससे बांग्लादेश में हिंदू आस्था के महत्वपूर्ण केंद्रों को संरक्षित किया जा सका।

2021: रमना काली मंदिर का पुनर्निर्माण

2021 में भारत ने बांग्लादेश के ऐतिहासिक रमना काली मंदिर के पुनर्निर्माण में सहायता देने की घोषणा की। यह मंदिर 1971 में पाकिस्तान के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान नष्ट कर दिया गया था। पुनर्निर्माण के बाद उसी वर्ष मंदिर का उद्घाटन किया गया। इससे दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध और मजबूत हुए।

2022: कंबोडिया के अंगकोर विरासत परिसर का संरक्षण

2022 में भारत ने विश्व प्रसिद्ध अंगकोर विरासत परिसर के प्रमुख हिस्सों जैसे ता प्रोहम, अंगकोर वाट और प्रेह विहार मंदिर के संरक्षण का कार्य किया। यह दुनिया में भारत के बाहर हिंदू सभ्यता के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है।

2024: लाओस के वाट फू मंदिर का संरक्षण

2024 में भारत ने यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल वाट फू मंदिर के महत्वपूर्ण हिस्सों का संरक्षण किया। करीब 1,000 वर्ष पुराना यह शिव मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में सनातन सभ्यता के सबसे पुराने जीवित प्रतीकों में से एक माना जाता है।

प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में भारत की भूमिका

योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई नई संरक्षण परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इंडोनेशिया की संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर प्रम्बानन मंदिर परिसर के कई छोटे मंदिरों के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य करेगा।

क्या है प्रम्बानन मंदिर की खासियत?

  1. प्रम्बानन इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के पास स्थित सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है। इसका मूल निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था।
  2. समय-समय पर आए भूकंपों, विशेषकर मई 2006 के जावा भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोटों और 11वीं शताब्दी की शुरुआत में राजनीतिक बदलावों के कारण यह मंदिर परिसर काफी क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में 17वीं शताब्दी में इसे फिर से खोजा गया।
  3. प्रम्बानन मंदिर परिसर में कुल 240 मंदिर हैं, जो भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित हैं। पूरे परिसर की रचना तीन वर्गाकार घेरों में की गई है।
  4. पूरे परिसर में 224 मंदिर बने हुए हैं। सबसे अंदर वाले हिस्से में 16 प्रमुख मंदिर हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण 47 मीटर ऊंचा भगवान शिव का मुख्य मंदिर है। इसके उत्तर में ब्रह्मा मंदिर और दक्षिण में विष्णु मंदिर स्थित है।
  5. यूनेस्को के मुताबिक, प्रम्बानन मंदिर की पत्थर की दीवारों पर रामायण के इंडोनेशियाई संस्करण की कहानी सुंदर नक्काशी के रूप में उकेरी गई है।
  6. प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया में शैव कला और स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है और इसे विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।
  7. मंदिर के संरक्षण का काम वर्ष 1918 से लगातार अलग-अलग चरणों में चलता रहा है। इसमें पारंपरिक तरीके से पत्थरों को जोड़ने की तकनीक के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों और कंक्रीट का भी उपयोग किया गया है ताकि मंदिर की संरचना मजबूत बनी रहे।
  8. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के साथ-साथ 1998 में इसे इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर भी घोषित किया गया था।

पूर्णिमा की रात होता है रामायण बैले का मंचन

हर वर्ष मई से अक्टूबर के बीच पूर्णिमा की रातों में प्रम्बानन मंदिर के दक्षिणी हिस्से में बने खुले रंगमंच पर रामायण बैले का भव्य मंचन किया जाता है। यह आयोजन दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा और भारत द्वारा शुरू की गई संरक्षण परियोजना को भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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