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Bhagwan Dhanvantari Puja : धनतेरस पर ऐसे करें भगवान धन्वंतरि की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन ही आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण से इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर के साथ-साथ आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की भी पूजा होती है। यह दिन धन-वैभव के साथ-साथ जीवन में अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को भी दर्शाता है।

इसी दिन से पांच दिवसीय दिवाली पर्व भी शुरु हो जाता है। यह दिन विशेष रूप से खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है। इसी कारण से इस दिन हर कोई किसी न किसी शुभ वस्तु की खरीदारी अवश्य करता है। चलिए  जानते हैं इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करनी है, क्या है पूरी विधि।

भगवान धन्वंतरि की पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर की शाम 06:02 से 07:57 तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल 05:33 PM से 08:09 PM बजे तक तो वृषभ काल 06:02 PM से 07:57 PM तक रहेगा।

भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि

  • धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार पूजा करना चाहिए।
  • पूजा में सबसे पहले धन्वं‍तरि देव के सामने धूप, दीप जलाएं।
  • फिर उनके मस्तक पर हल्दी, चंदन और चावल लगाएं।
  • फिर उन्हें फूल माला पहनाएं।
  • फिर भगवान धन्वंतरि के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  • अंत में उनकी आरती करके भोग लगाना चाहिए।
  • पूजा के बाद मुख्य द्वार या आंगन में दीये जलाएं और एक दीया यम के नाम का भी जलाएं। साथ ही घर के सभी कोने में भी दीए जलाएं।

धन्वंतरि भगवान पूजा मंत्र 

  • ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
  • अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
  • त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
  • श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

धन्वंतरि भगवान की आरती

ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।

जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।

देवासुर के संकट आकर दूर किए।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।

सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।

आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।

असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।

वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।

रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की पौराणिक कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान धन्वंतरि का अवतरण समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। जब समुद्र का मंथन हुआ तब उसमें से कई दिव्य रत्न निकले थे। उन्हीं में से एक भगवान धन्वंतरि भी थे, जो अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले धन्वंतरि जी को संपूर्ण संसार का पहला वैद्य कहा जाता है, जिन्होंने पूरी मानवता को आरोग्यता और आयुर्वेद का ज्ञान दिया। यही कारण है कि उनके प्राकट्य दिवस की उपलक्ष्य में ही हर साल धनतेरस का यह पावन पर्व मनाया जाता है।

 

डिस्क्लेमर :  उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।