नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो-2026 के विशाल आयोजन ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह समूचे ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला बड़ा एआई इवेंट है। पीएम मोदी के आह्वान पर दुनिया के ताकतवर देशों के 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 60 से अधिक मंत्री 500 से ज्यादा ग्लोबल एआई लीडर्स इस एआई समिट में शामिल हो रहे हैं। सिर्फ नई दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इसे भारत के लिए AI के बड़े अवसर के रूप में देख रही है, जो उसे आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) का ग्लोबल मास्टर बनाने की राह पर आगे बढ़ा रहा है।
16-20 फरवरी तक चलने वाली इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत एआई क्रांति का सिर्फ हिस्सा नहीं, बल्कि इसे लीड और शेप कर रहा है। वहीं पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी इस सम्मेलन में मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “भारत एआई में लीडर बनने की मजबूत स्थिति में है और इसको बड़े पैमाने पर समाज में अपनाने का प्रदर्शन कर सकता है। एआई की दिशा में भारत के बढ़ते कदम से दुनिया हैरान है। इसकी एक वजह भारत का अनोखा एप्रोच है, क्योंकि पश्चिमी देशों में एआई को लेकर चिंताएं हावी हैं। जॉब लॉस, एथिकल रिस्क, रेगुलेशन की कमी और सोसाइटी पर असर को लेकर लोग असमंजस में हैं।
एआई से एंग्जायटी में पश्चिम, आशावाद में भारत : पूर्व ब्रिटिश पीएम सुनक ने कहा कि एआई को लेकर एक तरफ जहां, पश्चिमी देशों में ओवरराइडिंग फीलिंग एंग्जायटी है, वहीं दूसरी ओर भारत में इनक्रेडिबल ऑप्टिमिज्म और ट्रस्ट है। यह अंतर इसलिए है, क्योंकि भारत एआई को समस्या नहीं, बल्कि समाधान मानता है। यहां लोग एआई को फियर नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और गवर्नेंस में अवसर के रूप में देखते हैं।
भारत की ताकत क्या है? : एआई के क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी ताकत डीप टैलेंट पूल यानी दुनिया का सबसे बड़ा युवा पॉपुलेशन और आईटी स्किल्ड वर्कफोर्स है, जो विश्व में अन्य किसी देश के पास नहीं है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी 2025 की वैश्विक रिपोर्ट में भारत तीसरे स्थान पर है। स्ट्रॉन्ग डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), UPI, आधार, ABDM (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) जैसे सिस्टम एआई को स्केल करने में मदद करते हैं। सुनक ने कहा, “भारत में मास एडॉप्शन पर फोकस है, जो टैलेंट, DPI और टेक्नोलॉजी-सपोर्टिव पब्लिक से बैक्ड है।”
भविष्य में क्या है भारत का एआई मिशन? : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को एआई का हब बनाना चाहते हैं। मोदी सरकार ने अब तक एआई पर 10,372 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत में एआई के क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है। आगे भारत सरकार भी हजारों-लाखों करोड़ रुपये एआई में खर्च करने वाली है। इसके तहत 38,000 से अधिक GPUs शेयर कम्प्यूट के लिए उपलब्ध हैं, 12 इंडिजिनस फाउंडेशन मॉडल्स डेवलप हो रहे हैं और 30 से ज्यादा इंडिया-स्पेसिफिक एआई एप्लीकेशंस अप्रूव्ड किए गए हैं। भारत के एआई समिट में शिरकत कर रहे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा, “भारत में बदलाव की स्पीड हैरान करने वाली है। भारत टाटा और ओपनएआई जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके 100 MW AI इंफ्रास्ट्रक्चर (स्केलेबल टू 1 GW) बन रहा है, जो भविष्य में भारत की एआई क्षमता दर्शाती है।
इन देशों के साथ एआई में साझेदारी : भारत ने मुख्य रूप से फ्रांस के साथ विशेष ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप अपग्रेड की है। इसके तहत 2026 को इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन घोषित किया गया है। एआई में स्वास्थ्य, इनोवेशन, ट्रस्टवर्थी एआई और ग्लोबल एआई डिवाइड को कम करने पर फोकस है। साथ ही इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ का उद्घाटन किया गया है। इसके अलावा केन्या ने एआई, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल्स में गहन सहयोग की मांग की है। साउथ-साउथ कोऑपरेशन पर जोर दिया गया है। वहीं यूएई के साथ पिछले हफ्ते जॉइंट एआई पार्टनरशिप घोषित की गई, जिसमें सुपरकंप्यूटिंग शामिल है। जबकि ब्राजील, स्पेन, इंडोनेशिया, उगांडा, घाना जैसे ग्लोबल साउथ देशों के साथ साझा लर्निंग, रेगुलेटरी अलाइनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनरशिप पर चर्चा की गई है।
भारत ने क्यों आयोजित किया एआई एक्सपो? : भारत में एआई एक्सपो आयोजित करने की कई वजहें हैं। समिट का फोकस एआई इम्पैक्ट पर है। भारत का विजन साफ है। एआई के साथ सेफ्टी से आगे बढ़कर डेवलपमेंट, इनक्लूसिव ग्रोथ और रिस्पॉन्सिबल एआई की नींव रखना। इसकी थीम “पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस” है, जो “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” से प्रेरित है। एक्सपो में 300 से ज्यादा एग्जिबिटर्स और 30 से अधिक देशों के 10 से ज्यादा थीमेटिक पेविलियंस हैं, जहां एआई के रियल-वर्ल्ड यूज दिखाए जा रहे हैं। जैसे क्लाइमेट रेजिलिएंस, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर में एआई का उपयोग।
क्यों हैरान है दुनिया? : पूरी दुनिया भारत की बढ़ती एआई क्षमताओं को लेकर हैरान है, क्योंकि भारत एआई को सिर्फ कंज्यूम नहीं कर रहा, बल्कि क्रिएट और डिप्लॉय कर रहा है। पश्चिमी देशों में डिबेट इस बात को लेकर है कि भविष्य में “AI क्या कर सकता है?”…जबकि भारत में “देश AI के साथ क्या कर रहा है” को लेकर चर्चा हो रही है। भारत की इसी खूबी को देखकर पूर्व ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने कहा, “लीडरशिप इन्वेंट करने पर नहीं, डिप्लॉय करने पर निर्भर है।” भारत एआई को डेमोक्रेटाइज कर रहा है। वह ग्लोबल साउथ के लिए मॉडल बन रहा है। यह समिट भारत को ग्लोबल एआई हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। दुनिया अब देख रही है कि भारत न सिर्फ फॉलो कर रहा है, बल्कि ऑप्टिमिज्म, स्केल और इम्पैक्ट के साथ लीड भी कर सकता है।







