नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि सरकार ने इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA), इसके प्रतिनिधियों और अधिकारियों को विशेषाधिकार देने का फैसला किया है। इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट किया, ‘यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा) अधिनियम, 1947 के तहत अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस, इसके प्रतिनिधियों और अधिकारियों को विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा प्रदान करने वाली राजपत्र अधिसूचना जारी किया है।
यह महत्वपूर्ण कदम बिग कैट संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को साबित करता है। बिग कैट और उनके पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण है और इसमें हमारे ग्रह की भलाई है। इन विशेषाधिकारों और प्रतिरक्षाओं के साथ, आईबीसीए (IBCA) को दुनिया भर में बिग कैट के संरक्षण के लिए सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक सशक्तिकरण प्राप्त होता है।’
0 अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में
- मुख्यालय: भारत (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय)
- उद्देश्य: सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों का वैश्विक संरक्षण
- कवर की गई प्रजातियाँ: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा
0 IBCA के प्रमुख फोकस क्षेत्र
- संरक्षण: बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा
- अवैध वन्यजीव व्यापार: शिकार विरोधी कानूनों को सख्त करना और प्रवर्तन को मजबूत करना
- वित्तीय और तकनीकी सहायता: संरक्षण प्रयासों में रेंज और गैर-रेंज देशों का समर्थन करना
- जलवायु परिवर्तन: संरक्षण को स्थिरता पहलों के साथ एकीकृत करना
- शोध और निगरानी: डेटा साझा करना और पारिस्थितिक अध्ययन करना
- वित्त पोषण: संरक्षण परियोजनाओं के लिए संसाधनों का प्रबंधन
0 उद्देश्य और कार्य
- वैश्विक संरक्षण: बड़ी बिल्ली प्रजातियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना
- नीति समर्थन: संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप रणनीतियों को संरेखित करना
- सहयोगी मंच: संरक्षण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं और डेटा को साझा करना
- संसाधन प्रबंधन: आवास संरक्षण और शिकार विरोधी पहलों के लिए पर्याप्त वित्त पोषण सुनिश्चित करना
- शोध और निगरानी: प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की स्थिति का सतत अध्ययन करना







