प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ उपवास है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानते हैं कि मई में प्रदोष का व्रत कब-कब रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन महादेव के साथ मां गौरी की पूजा का विधान है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है, जिसमें एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष में होता है।
प्रदोष का व्रत सप्ताह के जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी दिन के हिसाब से रखा जाता है। प्रदोष का दिन जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं और जो प्रदोष शनिवार के दिन आता है उसे शनि प्रदोष कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि मई में प्रदोष का व्रत कब-कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
मई में प्रदोष व्रत कब-कब पड़ेंगे : 14 और 28 मई को प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। मई में दोनों प्रदोष गुरुवार के दिन ही पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष कहा जाएगा। गुरु प्रदोष को बृहस्पति प्रदोष भी कहा जाता है। गुरु प्रदोष व्रत को अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। दिन व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मई का पहला व दूसरा प्रदोष व्रत डेट और पूजा शुभ मुहूर्त : मई में पहला प्रदोष व्रत 14 मई को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई को 11 बजकर 20 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। गुरु कृष्ण प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त 14 मई को शाम 7 बजकर 5 मिनट से रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
मई में दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 मई को सुबह 7 बजकर 56 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 29 मई को सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर होगा। प्रदोष पूजा मुहूर्त 28 मई 2026 को शाम 7 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







