ब्रासीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में रूढ़िवादी प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर फिर से चुन लिए गए हैं। देश के चुनाव प्राधिकरण ने यह घोषणा की, जिससे लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वामपंथी नेतृत्व के अधीन बनी रहेगी।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की लाइव चुनाव कवरेज के अनुसार, 78 प्रतिशत से अधिक वोटों की गिनती के बाद लूला 51.21 प्रतिशत वोटों के साथ आगे चल रहे थे, जबकि बोल्सोनारो को 48.79 प्रतिशत वोट मिले थे। चुनाव प्राधिकरण द्वारा लूला की जीत की पुष्टि करने से पहले ही पोलस्टर डेटाफोलहा ने उनकी जीत का अनुमान लगा लिया था।
ट्रंप के लिए बड़ा झटका
यह परिणाम लैटिन अमेरिका में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सहयोगियों के लिए एक बड़ा झटका है। बोलसोनारो की जीत ब्राजील में दक्षिणपंथी झुकाव को दर्शात। वहीं, लूला की जीत का मतलब है कि अब ब्राजील और मेक्सिको दोनों देशों में वामपंथी विचारधारा वाले नेता हैं। सीनेटर फ्लावियो बोलसोनारो ने वॉशिंगटन के साथ करीबी रिश्ते बनाने के मुद्दे पर चुनाव प्रचार किया था।
उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर समझौते करने का वादा भी किया था। लूला ने ब्राजील के प्रति अमेरिकी नीतियों की आलोचना की थी। इनमें ब्राजीलियाई निर्यात पर लगाए गए शुल्क और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
यह मुकाबला दो बिल्कुल विपरीत राजनीतिक खेमों के बीच था। इनके बीच अमेरिका के साथ संबंधों, अपराध, जलवायु नीति और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद थे।







