नई दिल्ली। अभिनेता सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ Battle Of Galwan के टीजर ने चीन में हलचल पैदा कर दी है। वहां के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दिखाया गया है। फिल्म में सलमान खान कर्नल संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं, जिनका 2020 में गलवान में बलिदान हुआ था। भारत में फिल्मकारों ने चीनी दावों को गलत बताया और कहा कि फिल्म पूरी रिसर्च के साथ बनाई गई है।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान की की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ हाल ही में जारी टीजर ने चीन में खलबली मचा दी है। फिल्म के टीजर से उसको तीखी मिर्ची लगी है। चीन के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। यह फिल्म 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प आधारित है।
इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व लखिया ने किया है। फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रंगदा सिंह मुख्य महिला किरदार में हैं, जबकि जेन शॉ, अंकुर भाटिया और विपिन भारद्वाज भी अहम किरदारों में नजर आएंगे। फिल्म में सलमान खान कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं, जो 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे और गलवां में पीएलए सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
चीनी के सरकारी अखबार के लेख में क्या कहा गया? : चीन की कम्यनिस्ट पार्टी की सरकार के नियंत्रण वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि जून 2020 की झड़प को फिल्म में जिस तरह दिखाया गया है, वह तथ्यों से मेल नहीं खाता। लेख में तथाकथित विशेषज्ञों का हवाला देते हुए फिल्म को ओवर-द-टॉप (ओटीटी) बताया गया और कर्नल संतोष बाबू के बलिदान को ‘तथाकथित अहम भूमिका’ कहकर खारिज किया गया। इस कथित लेख में कहा गया कि बॉलीवुड फिल्में भावनात्मक और मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, लेकिन कोई भी सिनेमाई अतिशयोक्ति इतिहास को बदल नहीं सकती और न ही पीएलए की संप्रभुता की रक्षा करने के संकल्प को कमजोर कर सकती है।
भारतीय सैनिकों पर लगाया एलएसी पार करने का आरोप : गलवां नदी घाटी चरम मौसम और ऊंचाई वाले इलाके में स्थित है और यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पश्चिमी हिस्से में पूर्वी लद्दाख के अक्साई चिन क्षेत्र के पास पड़ती है। ग्लोबल टाइम्स के लेख में झूठा दावा किया गया कि गलवां घाटी एलएसी के चीनी हिस्से में आती है। इसमें जून 2020 की झड़पों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि भारतीय सैनिकों ने एलएसी पार की और टकराव के लिए उकसाया। लेख में यह भी आरोप लगाया गया कि भारतीय सेना की कार्रवाइयों से सीमा क्षेत्र की स्थिरता बिगड़ी, चीनी कर्मियों की जान को खतरा हुआ और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का उल्लंघन हुआ।
हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों का बलिदान : भारत ने आधिकारिक तौर पर माना है कि इस खूनी झड़प में उसके 20 सैनिकों का बलिदान हुआ था। हालांकि, चीनी लेख में आरोप लगाया गया कि भारत ने हताहतों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश की। वहीं, चीन ने पहले किसी नुकसान से इनकार किया था और बाद में सिर्फ चार सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी।
लेख में यह भी कहा गया कि भारत फिल्मों, खासकर बॉलीवुड फिल्मों का इस्तेमाल राष्ट्रवादी भावनाएं भड़काने के लिए करता है। एक चीनी सैन्य विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से कहा गया कि कोई भी फिल्म किसी देश की जमीन को प्रभावित नहीं कर सकती।
भारत में प्रतिक्रिया : भारतीय फिल्मकारों ने चीनी मीडिया के इन दावों को मनगढ़ंत बताया है। फिल्मनिर्माता अशोक पंडित ने कहा कि चीनी प्रतिक्रिया कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि जब भी कोई भारतीय फिल्मकार फिल्म बनाता है, तो दुश्मन देश की गतिविधियां सबके सामने आ ही जाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत देश है और उसकी सुरक्षा बल देश के लिए बहादुरी से लड़ते हैं, इसलिए ग्लोबल टाइम्स की यह प्रतिक्रिया असुरक्षा को दिखाती है। अभिनेता और निर्माता राहुल मित्रा ने भी कहा कि ग्लोबल टाइम्स की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली नहीं है, क्योंकि यह सरकार का मुखपत्र है। उन्होंने कहा कि फिल्में पूरे शोध के साथ बनती हैं और सलमान खान और अपूर्व लखिया जैसे नाम बिना तथ्यों के कोई फिल्म नहीं बनाएंगे।







