रायपुर। यह वही तीजन बाई थीं, जिन्होंने पंडवानी को गांव-गांव से निकालकर विश्व मंच तक पहुंचाया और अपनी दमदार प्रस्तुति से लोककला को नई पहचान दिलाई। उनके निधन के बाद उनके जीवन से जुड़ी कई यादें फिर ताजा हो रही हैं। उन्हीं में से एक घटना वर्ष 2016 की है, जब रोहतक में कार्यक्रम के दौरान उनके बहुमूल्य और प्रिय गहने चोरी हो गए थे।
बिना गहनों के देनी पड़ी थी प्रस्तुति : एमडीयू में आयोजित सात दिवसीय ‘चलो थिएटर’ फेस्टिवल की पहली प्रस्तुति तीजन बाई की थी। गहने चोरी होने के बावजूद उन्होंने कार्यक्रम रद्द नहीं किया और बिना आभूषणों के ही मंच पर प्रस्तुति दी। दर्शकों ने उनकी कला को उतना ही सराहा, जितना हमेशा करते थे।
गहनों से था गहरा भावनात्मक जुड़ाव : तीजन बाई ने उस समय बताया था कि बैग में करीब 6.5 किलो गहने थे, जिनमें तीन किलो की करधन, 250 ग्राम की अंगूठी, बाजूबंद और अन्य आभूषण शामिल थे। ये वही गहने थे जिन्हें वे लगभग हर मंचीय प्रस्तुति में पहनती थीं। उनके लिए इनका महत्व केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था।
यादों में जीवित हैं तीजन बाई: अब जब पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई इस दुनिया में नहीं रहीं, तब उनके जीवन के संघर्ष, उपलब्धियां और ऐसे प्रसंग लोगों को उनकी सादगी, समर्पण और कला के प्रति जुनून की याद दिलाते हैं। गहने चोरी होने की घटना ने भले उन्हें दुखी किया था, लेकिन उस दिन भी उन्होंने साबित कर दिया था कि उनकी असली पहचान उनके आभूषण नहीं, बल्कि उनकी अमर आवाज और अद्भुत कला थी।







