कोरबा। जिले से सटे करूमौहा जंगल में बाघ के पैर के निशान मिले है। 29 जुलाई को एक किसान घर लौट रहा था। तभी उसे किसी जानवर के पद चिन्ह दिखाई दिए। किसान ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी। विभाग ने चिन्हों का फुट प्रिंट तैयार कर जांच के लिए लैब भेज दिया है, ताकि बाघ होने की पुष्टि हो सके। जंगल में मिले पैर के निशान लगभग 15 सेंटीमीटर के थे।
इधर बाघ की आमदरफ्त की खबर से ग्रामीण दहशत का माहौल हैं। उन्हें खुद के अलावा अपने मवेशियों की चिंता सता रही है। एहतियातन जंगल में गश्त बढ़ा दी गई है। संभवतः यह पहला अवसर है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर कोरबा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम करूमौहा स्थित है। जहां रहने वाले अधिकांश परिवार खेती किसानी का काम करते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी किसान हैं, जिनकी जमीन जंगल के करीब है। बताया जा रहा है कि एक किसान खेती करने गया था। वह खेत से काम निपटाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान उसकी नजर कक्ष क्रमांक पी 1002 में एक पग चिंह पर पड़ी, जिसे देख किसान चौक गया। दरअसल पग चिंह सामान्य वन्य प्राणियों के पद से बड़ा था। जिस स्थान पर पग चिंह था, वहां जमीन धंस गया था। जिसकी जानकारी किसान ने गांव पहुंचकर दी। ग्रामीणों ने जंगल में जाकर देखा तो उन्हें बाघ के पहुंचने की आशंका हुई। ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों को सूचना दे दी।
यह खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए। वन विभाग के आला अफसरों के निर्देश पर वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा ने डिप्टी रेंजर अजय कुमार सिदार के नेतृत्व में टीम रवाना कर दिया। वन विभाग की टीम देर शाम मौके पर पहुची। यह पगचिंह करीब 15 सेंटीमीटर का था, जो सामान्य वन्य प्राणी के पैर से बड़ा है। जिससे पगचिंह को बाघ का माना जा रहा है। टीम जंगल के भीतर अवलोकन करते हुए आगे बढ़ी तो चाकामार-कल्दामार के जंगल में अंतिम जंगल में पग चिंह मिला है। निरीक्षण उपरांत फुट प्रिंट तैयार किया गया है। एहतियातन गांवों में मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने समझाईश दी जा रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा ने बताया कि संभावना जताई जा रही है कि वन्यप्राणी कल्दामार के जंगल में डेरा डाला होगा। संयुक्त टीम ने जंगल में मिले पगचिंह का फुट प्रिंट भी तैयार किया है, जिसे जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि पदचिंह की पहचान हो सके।
करीब दो माह पहले कटघोरा वनमंडल के पाली वन परिक्षेत्र अंतर्गत जेमरा के आसपास बाम के पग चिंह मिले थे। इसके बाद करीब पखवाड़े भर पहले अजगर बहार और रनई पहाड़ी में वन्य प्राणी के पैर का निशान मिला था, जिसे बाप का पग चिंह माना जा रहा था। संभावना जताई जा रही है कि चैतुरगढ़ के आसपास घुमने के बाद बाघ पुटका पहाड़ के रास्ते बाघ करूमौहा के जंगल पहुंचा होगा। वन अमला अलर्ट मोड में है। ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने हिदायत दी जा रही है। इसके अलावा मुनादी भी कराए जा रहे हैं, इसके अलावा जंगल में टैप कैमरे लगाने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि कैमरे में कैद तस्वीर से वन्य प्राणी की पहचान की जा सके।







