Home » धान के कटोरे में चावल महंगा: 35 रुपये किलो वाला चावल 50 रुपये तक पहुंचा
छत्तीसगढ़

धान के कटोरे में चावल महंगा: 35 रुपये किलो वाला चावल 50 रुपये तक पहुंचा

होटल-रेस्टोरेंट का बजट भी बिगड़ा

रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अब इसी राज्य में चावल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बिलासपुर में पिछले एक महीने के दौरान चावल की कई किस्मों के दाम 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। पहले 35 रुपये किलो मिलने वाला सामान्य उसना और खंडा चावल अब 50 रुपये तक बिक रहा है, वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाले चावल की कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसका असर घरों की रसोई से लेकर होटल और रेस्टोरेंट के कारोबार पर भी पड़ रहा है।

चावल महंगा होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पिछले खरीफ सीजन के धान का स्टॉक कम होना, नई फसल की आवक का इंतजार और त्योहारी सीजन में सुगंधित व ब्रांडेड चावल की मांग बढ़ना इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, कई ब्रांडेड कंपनियों के पैकबंद चावल के दाम फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं।

नई फसल आने तक कीमतों में दबाव रहने की आशंका

छत्तीसगढ़ में पिछले सीजन के धान का स्टॉक कम होने से बाजार में चावल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार ने 15 नवंबर से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, सरकारी धान खरीदी की दर और बाजार में चावल की खुदरा कीमतें अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती हैं। धान की खरीद लागत के साथ मिलिंग, परिवहन, चावल की गुणवत्ता और बाजार में उपलब्ध स्टॉक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ी परेशानी

चावल की कीमतों में तेजी का असर होटल और रेस्टोरेंट के बजट पर भी पड़ रहा है। यहां रोजाना बड़ी मात्रा में चावल की खपत होती है। ऐसे में प्रति किलो कीमत बढ़ने से महीने का खर्च काफी बढ़ सकता है। होटल संचालकों के सामने अब दोहरी चुनौती है। उन्हें बढ़ती लागत को संभालने के साथ ग्राहकों को पहले जैसी गुणवत्ता भी देनी है। चावल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो थाली के दाम बढ़ाने या चावल की किस्म बदलने जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।

थोक बाजार से खुदरा दुकानों तक पहुंच रही महंगाई

व्यापार विहार के कारोबारी नीरज नागदेव के मुताबिक, थोक बाजार में चावल महंगा होने का असर खुदरा दुकानों पर भी दिखाई देता है। हालांकि, अलग-अलग दुकानदारों के पास पुराने और नए स्टॉक की मात्रा अलग होती है। इस वजह से एक ही किस्म के चावल की कीमत दुकानों पर अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में ग्राहकों को खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों पर भाव की तुलना करनी चाहिए।

राइस मिलों में पुराने धान का स्टॉक कम

राइस मिल संचालक अशोक जायसवाल का कहना है कि पुराने धान का स्टॉक लगभग समाप्त होने से चावल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ी है, लेकिन बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से कीमतों पर दबाव पड़ रहा है।

जमाखोरी की आशंका, निगरानी की जरूरत

चावल की बढ़ती कीमतों के बीच बाजार में स्टॉक और बिक्री दरों की जांच की मांग भी उठ रही है। कीमतों में बढ़ोतरी की वास्तविक वजह जानने के लिए खाद्य विभाग और जिला प्रशासन को थोक विक्रेताओं के स्टॉक, खरीद के बिल और खुदरा बिक्री दरों की निगरानी करनी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कीमतें आपूर्ति की कमी और बढ़ती लागत के कारण बढ़ रही हैं या कहीं कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है।

आम लोगों की रसोई पर सीधा असर

चावल रोजाना इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्यान्न है। इसकी कीमतों में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी महीने के घरेलू बजट को प्रभावित करती है। खासकर उन परिवारों के लिए परेशानी बढ़ सकती है, जिनकी आय सीमित है और भोजन पर खर्च का बड़ा हिस्सा चावल पर निर्भर करता है। ऐसे में बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना, कीमतों की नियमित निगरानी करना और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करना जरूरी है।