दुर्ग। पद्मविभूषण डॉक्टर तीजन बाई के निधन के बाद उनके गृह ग्राम गनियारी में दशगात्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रमुख रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पंडवानी गायिका तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों से मुलाकात की।
दशगात्र कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, मंत्री राजेश अग्रवाल, दुर्ग सांसद विजय बघेल और विधायक भी शामिल हुए। छत्तीसगढ़ लोक कला जगत के कलाकार और गनियारी के हजारों लोग भी वहां मौजूद थे। सभी ने तीजन बाई को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि दी।
अंतर्राष्ट्रीय पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन 5 जुलाई को रायपुर के एम्स में हुआ था। इसके बाद उनके गृह ग्राम गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंच से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री की घोषणाएं : मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से अब एक अलंकरण तीजन बाई के नाम से दिया जाएगा। जिस तंबूरे को लेकर वे पंडवानी गायन करती थीं, उसे रायपुर के घासीदास संग्रहालय में रखा जाएगा। गनियारी गांव का शासकीय हाई स्कूल भी अब डॉक्टर तीजन बाई के नाम से जाना जाएगा। कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री और पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था।
मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि लोककला और पंडवानी गायन का जब भी जिक्र होगा। पद्मविभूषण तीजन बाई का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने तीजन बाई के परिजनों को आश्वासन दिया कि उनके निधन के पश्चात उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा। यह सम्मान उनकी कला और छत्तीसगढ़ की विरासत को चिरस्थायी बनाएगा।







