देहरादून। उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर ठगों ने श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा के नाम पर फर्जी हेलीकॉप्टर टिकट, नकली होटल बुकिंग, फर्जी ट्रैवल एजेंसियां और सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइटों के जरिए लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही है. बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4 सी ने देशव्यापी अलर्ट जारी कर श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
चारधाम यात्रा के दौरान ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। हर साल अप्रैल से नवंबर तक चलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग का सहारा लेते हैं और इसी का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। श्रद्धालुओं को “वीआईपी दर्शन”, “गारंटीड हेलीकॉप्टर टिकट”, “कम कीमत में होटल बुकिंग” और “फ्री यात्रा सुविधा” जैसे लालच देकर फंसाया जा रहा है। कई मामलों में लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत तक गंवा दी है।
ऐसा ही एक मामला ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले से सामने आया, जहां 50 वर्षीय बिघ्नाराज चंद अपने परिवार के साथ चारधाम यात्रा की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे के परिचित एक ट्रैवल एजेंट पर भरोसा किया, जिसने परिवहन, होटल और हेलीकॉप्टर बुकिंग सहित पूरा यात्रा पैकेज देने का दावा किया। एजेंट ने फोन पे के जरिए अलग-अलग किस्तों में करीब 4 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। परिवार को मई 2025 में यात्रा पर जाना था, लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण यात्रा टल गई। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि अगले वर्ष यात्रा कराई जाएगी, लेकिन जब 2026 में परिवार ने दोबारा संपर्क किया तो एजेंट गायब हो चुका था। होटल बुकिंग और यात्रा की सभी बातें झूठी निकलीं। बाद में पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
ओडिशा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने धार्मिक आस्था और यात्रा की जल्दबाजी का फायदा उठाकर लोगों को फर्जी डिजिटल भुगतान के जाल में फंसाया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन में भावनात्मक जुड़ाव होने के कारण लोग अक्सर जल्दबाजी में फैसले ले लेते हैं। साइबर सुरक्षा विश्लेषक पवन दुग्गल के अनुसार, श्रद्धालु भीड़भाड़ और टिकट खत्म होने के डर से बिना सत्यापन किए ऑनलाइन भुगतान कर देते हैं। ठग इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और फर्जी सोशल मीडिया पेज, नकली वेबसाइट और झूठी ऑनलाइन समीक्षाओं के जरिए भरोसा पैदा करते हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कई धोखेबाज आईआरसीटीसी, पवन हंस या अधिकृत हेलीकॉप्टर कंपनियों जैसे नामों से मिलते-जुलते फर्जी पोर्टल बनाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। इन वेबसाइटों पर नकली रिव्यू और फर्जी रेटिंग डालकर उन्हें असली जैसा दिखाया जाता है। फिर श्रद्धालुओं से तुरंत यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के जरिए भुगतान करने को कहा जाता है।
हाल ही में उत्तराखंड एसटीएफ ने भी ऐसे ही एक साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया, जो फर्जी वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों के जरिए केदारनाथ हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था। कई श्रद्धालुओं ने इन्हें अधिकृत सेवा प्रदाता समझकर पैसे ट्रांसफर कर दिए थे। जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर बार-बार सकारात्मक कमेंट और नकली फीडबैक पोस्ट कर वेबसाइटों की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक धार्मिक पर्यटन से जुड़े साइबर अपराध तेजी से संगठित गिरोहों के नियंत्रण में जा रहे हैं। लोगों को केवल अच्छी रेटिंग या सोशल मीडिया फॉलोअर्स देखकर किसी वेबसाइट या एजेंसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल और अधिकृत ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ही बुकिंग करें।
देशभर में बढ़ते साइबर अपराध के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2024 में देश में 1 लाख 1 हजार 928 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए, जो 2023 की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े रहे। तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बुकिंग के बढ़ते चलन ने जहां यात्राओं को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगों के लिए नए अवसर भी पैदा कर दिए हैं। गृह मंत्रालय और आई4 सी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी आकर्षक ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें, संदिग्ध वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्रोफाइल से सावधान रहें, भुगतान से पहले सभी जानकारियों का सत्यापन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।







