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जब उतरा बॉलीवुड का खुमार, क्रैक की UPSC और बन गई IAS अधिकारी

IAS बनने का सफर जरा भी आसान नहीं होता और खास तौर पर चकाचौंध की जिंदगी जीने वाले एक्टर्स के लिए। ग्लैमर और स्टार लाइफ छोड़ सिविल सर्वेंट बनने की चाहत कम ही सितारों की होती है, लेकिन एक एक्ट्रेस ऐसी थीं, जिन्होंने कम उम्र में ही फिल्मों में सफलता हासिल की, लेकिन फिर भी उन्होंने IAS बनने की ठानी।

बचपन आमतौर पर खिलौनों, खेल और मासूम शरारतों का समय होता है, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बहुत कम उम्र में ही जिम्मेदारियों और पहचान की दुनिया में कदम रख देते हैं। ऐसी ही एक असाधारण बच्ची थीं एचएस कीर्तना, जिनका बचपन कैमरे की फ्लैश लाइट, सेट की हलचल और तालियों की गूंज के बीच बीता। कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की यह चमकती हुई बाल कलाकार अपनी मासूम अदाकारी और सहज अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज कर रही थीं। लेकिन किस्मत ने उनकी जिंदगी के लिए एक अलग ही रास्ता चुना था, ऐसा रास्ता, जो ग्लैमर से दूर, सेवा और जिम्मेदारी से भरा हुआ था।

कम उम्र में बनाया सफल करियर : महज चार साल की उम्र में कीर्तना ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। ‘कर्पूरदा गोम्बे’, ‘गंगा-यमुना’, ‘उपेन्द्र’, ‘हब्बा’, ‘लेडी कमिश्नर’ जैसी कई चर्चित कन्नड़ फिल्मों और धारावाहिकों में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अपनी गहरी छाप छोड़ी। उनकी मासूम मुस्कान और भावपूर्ण अभिनय ने उन्हें कर्नाटक का जाना-पहचाना चेहरा बना दिया। कम उम्र में मिली यह सफलता किसी सपने से कम नहीं थी, लेकिन परदे की इस चमक के पीछे कीर्तना के दिल में एक और सपना पल रहा था, देश की सेवा करने का।

पहले बनी KAS अधिकारी : अपने पिता की इच्छा और अपने भीतर की आवाज को सुनते हुए कीर्तना ने एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया। उन्होंने सफल अभिनय करियर को अलविदा कहकर पढ़ाई और प्रशासनिक सेवाओं की ओर रुख किया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि जहां लोग शोहरत को थामे रखना चाहते हैं, वहीं कीर्तना ने सादगी और संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने कड़ी मेहनत से कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (KAS) की तैयारी की और वर्ष 2011 में यह परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने करीब दो वर्षों तक KAS अधिकारी के रूप में काम किया, जिसने उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को नजदीक से समझने का अवसर दिया।

कैसे तय किया IAS बनने का सफर? : साल 2013 में कीर्तना ने अपने सपनों को और ऊंची उड़ान देने का फैसला किया और यूपीएससी की तैयारी शुरू की। यह सफर आसान नहीं रहा। लगातार पांच प्रयासों में असफलता मिली, लेकिन हर बार उन्होंने खुद को संभाला और नए जोश के साथ आगे बढ़ीं। उनकी यह जिद और धैर्य ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। आखिरकार छठे प्रयास में, साल 2020 में, कीर्तना ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर 167वीं रैंक हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुईं। IAS बनने के बाद कीर्तना को मांड्या जिले में सहायक आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। यहां उन्होंने संवेदनशीलता, ईमानदारी और सक्रियता के साथ अपने दायित्व निभाए। उनके काम ने यह साबित कर दिया कि एक अच्छा प्रशासक बनने के लिए सिर्फ अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि मानवीय समझ और सेवा भावना भी जरूरी होती है। वर्तमान में एचएस कीर्तना जिला पंचायत, चिक्कमगलुरु के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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