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गोवर्धन पूजा : क्यों लगाया जाता है 56 भोग? जानें क्या-क्या चीजें होती हैं शामिल

दिवाली के बाद अगला त्यौहार गोवर्धन पूजा का होता है। इस दिन प्रात: गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। फिर शुभ मुहूर्त में गोवर्धन की विधि विधान पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, फूल, खील, बताशे आदि कई चीजों का प्रयोग किया जाता है। खासतौर से इस पूजा में ओंगा यानी अपामार्ग जरूर रखा जाता है। यहां हम आपको बताएंगे गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग का क्या महत्व होता है और इसमें क्या-क्या चीजें शामिल की जाती हैं।

इससे पहले जान लें कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा का प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:30 से 8:47 बजे तक रहेगा। गोवर्धन पूजा का सायाह्नकाल मुहूर्त दोपहर 3:36 से 5:52 बजे तक रहेगा।

गोवर्धन पूजा 56 भोग 

  1. पंजीरी
  2. मोहनभोग
  3. शक्कर पारा
  4. आलूबुखारा
  5. पापड़
  6. शहद
  7. शिकंजी
  8. माखन-मिश्री
  9. मूंग दाल हलवा
  10. मठरी
  11. किशमिश
  12. खिचड़ी
  13. सफेद-मक्खन
  14. चना
  15. खीर
  16. घेवर
  17. चटनी
  18. पकौड़े
  19. बैंगन की सब्जी
  20. ताजी क्रीम
  21. मीठे चावल
  22. रसगुल्ला
  23. पेड़ा
  24. मुरब्बा
  25. साग
  26. दूधी की सब्जी
  27. कचौरी
  28. भुजिया
  29. जलेबी
  30. काजू-बादाम बर्फी
  31. आम
  32. दही
  33. पूड़ी
  34. रोटी
  35. सुपारी
  36. रबड़ी
  37. पिस्ता बर्फी
  38. केला
  39. चावल
  40. टिक्की
  41. नारियल पानी
  42. सौंफ
  43. जीरा-लड्डू
  44. पंचामृत
  45. अंगूर
  46. कढ़ी
  47. दलिया
  48. बादाम का दूध
  49. पान
  50. मालपुआ
  51. गोघृत
  52. सेब
  53. चीला
  54. देसी घी
  55. छाछ
  56. मेवा

गोवर्धन पूजा में 56 भोग का महत्व – गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इस भोग से जुड़ी एक दिलचस्प कथा भी है। कहते हैं माता यशोदा कृष्ण जी को आठ पहर भोजन कराती थीं। जब इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था तो कहते हैं इस दौरान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक अन्न-जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया था। तब ब्रजवासियों और माता यशोदा ने मिलकर बाल गोपाल के लिए 56 व्यंजन बनाए क्योंकि माता यशोदा कृष्ण जी को आठ पहर भोजन कराती थी तो 7 दिन के हिसाब से 7X8 = 56 व्यंजन हुए। कहते हैं तभी से 56 भोग भगवान कृष्ण का प्रिय माना जाता है। इस भोग में मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा और कसैला हर प्रकार के स्वाद का भोजन शामिल होता है।

 

Disclaimer: उक्त लेख धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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