दीपावली का पर्व आज यानी 20 अक्टूबर को देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह कार्तिक माह की अमावस्या तिथि है। इस दिन घरों से लेकर मंदिरों में लक्ष्मी पूजन का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि होती हैं। घरों को दीयों की रोशनी से सजाते हैं। प्रदोष काल का समय लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व- दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ इस दिन भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने का विधान होता है। हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का खास महत्व होता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त। यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यानी प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना शुभ लाभों में वृद्धि और सर्वोत्तम माना जाता है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न स्थिर लग्न लग्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली की रात को अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने पर माता लक्ष्मी घर में अंश रूप में वास करने लगती हैं। चलिए आपको बताते हैं इस साल दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है।
दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2025
| दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2025 | 07:08 PM से 08:18 PM |
| दिवाली लक्ष्मी पूजन निशिता काल मुहूर्त 2025 | 11:41 PM से 12:31 AM, अक्टूबर 21 |
| दिवाली प्रदोष काल मुहूर्त 2025 | 05:46 PM से 08:18 PM |
| दिवाली वृषभ काल मुहूर्त 2025 | 07:08 PM से 09:03 PM |
| अमावस्या तिथि का प्रारम्भ | 20 अक्टूबर 2025 को 03:44 PM बजे |
| अमावस्या तिथि का समापन | 21 अक्टूबर 2025 को 05:54 PM बजे |
दीवाली लक्ष्मी पूजा चौघड़िया मुहूर्त
- अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 03:44 PM से 05:46 PM
- सायाह्न मुहूर्त (चर) – 05:46 PM से 07:21 PM
- रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 10:31 PM से 12:06 AM, अक्टूबर 21
- उषाकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 01:41 AM से 06:26 AM, अक्टूबर 21
दिवाली लक्ष्मी पूजन मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः
धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पदः
लक्ष्मी पूजा विधि
- लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई का खास महत्व है, इसलिए सभी जगह गंगाजल का छिड़काव करें।
- घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली और तोरण द्वार बनाएं।
- अब लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वप्रथम एक साफ चौकी पर लाल रंग का नया वस्त्र बिछाएं।
- अब चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें और सजावट का सामान से चौकी सजाएं।
- माता लक्ष्मी और गणेश भगवान की मूर्ति को वस्त्र पहनाएं और इस दौरान देवी को चुनरी अवश्य अर्पित करें।
- अब साफ कलश में जल भरें और चौकी के पास रखें दें।
- प्रथम पूज्य देवता का नाम लेते हुए भगवानों को तिलक लगाएं ।
- लक्ष्मी-गणेश को फूल माला पहनाएं और ताजे फूल देवी को अर्पित करें। इस दौरान कमल का फूल चढ़ाना न भूलें।
- अब अक्षत, चांदी का सिक्का, फल और सभी मिठाई संग भोग अर्पित करें।
- यदि आपने किसी वस्तु या सोना-चांदी की खरीदारी की है, तो देवी लक्ष्मी के पास उसे रख दें।
- शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और इसके साथ ही घर के कोने में रखने के लिए कम से कम 21 दिए भी इसके साथ जलाएं।
- अब भगवान गणेश जी आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ भी करें
- देवी लक्ष्मी की आरती और मंत्रों का जाप करें।
- अब घर के सभी कोनों में दीपक रखें और तिजोरी में माता की पूजा में उपयोग किए फूल को रख दें।
- अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।
डिस्क्लेमर: उक्त लेख धार्मिक व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







