नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम (BSE: 544780 | NSE: VAML), जिसका स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) झारसुगुडा, ओडिशा में स्थित है, भारत की दूसरी सबसे बड़ी SEZ सामान निर्यातक कंपनी बन गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में, कंपनी ने 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जो भारत के कुल SEZ सामान निर्यात का 6% है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि भारत के SEZ निर्यात में सेवाओं का दबदबा बना हुआ है; ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर EOUs & SEZs’ (EPCES) के नवीनतम व्यापार आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर कुल SEZ निर्यात में सेवाओं की हिस्सेदारी 60% से अधिक है।
वेदांता एल्युमीनियम का निर्यात यूरोप, अमेरिका, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया भर के 60 से अधिक देशों में ग्राहकों तक पहुँचता है। इन बाज़ारों से लगातार मांग — जिनमें से कई कड़े गुणवत्ता, पर्यावरण और अनुपालन मानकों को लागू करते हैं — कंपनी की विनिर्माण उत्कृष्टता और वैश्विक ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस और औद्योगिक ग्राहकों की सख्त ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता को रेखांकित करती है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए, वेदांता एल्युमीनियम के CEO राजेश कुमार ने कहा, “यह उपलब्धि हमारे एल्युमीनियम की लगातार गुणवत्ता और वैश्विक बाज़ारों द्वारा मांगे जाने वाले कड़े मानकों को पूरा करने की हमारी क्षमता का प्रमाण है। चूँकि भारत के SEZ देश के व्यापार में तेज़ी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, हम अपनी क्षमताओं का विस्तार करने और देश के वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने के लक्ष्य में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वेदांता एल्युमीनियम के निर्यात पोर्टफोलियो में इसके प्राथमिक और मूल्य-वर्धित उत्पादों की पूरी श्रृंखला शामिल है, जिसमें बिलेट्स, वायर रॉड्स, रोल्ड प्रोडक्ट्स, प्राइमरी फाउंड्री अलॉय, इंगॉट्स और साथ ही इसकी कम-कार्बन वाली ‘रेस्टोरा’ (Restora) एल्युमीनियम रेंज शामिल है। ये उत्पाद ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिकल, निर्माण और पैकेजिंग उद्योगों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों से जुड़े उभरते क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत के स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) से कुल मिलाकर लगभग US$134.4 बिलियन का सामान और सर्विस एक्सपोर्ट किया गया। इसमें सर्विस का हिस्सा सबसे ज़्यादा, यानी लगभग US$84.5 बिलियन (कुल एक्सपोर्ट का करीब 63%) रहा, जबकि सामान के एक्सपोर्ट का योगदान लगभग US$49.9 बिलियन (कुल का करीब 37%) था। यह भारत के ग्लोबल ट्रेड में सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग की एक-दूसरे की पूरक भूमिका को दिखाता है।
ये आंकड़े भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर में हो रहे बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं, जहाँ SEZ अब ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग, दोनों के लिए प्लेटफॉर्म के तौर पर काम कर रहे हैं। देश के SEZ से सामान एक्सपोर्ट करने वाली टॉप कंपनियों में वेदांता एल्युमीनियम की लगातार मौजूदगी यह दिखाती है कि इस बदलाव में भारतीय मेटल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का महत्व तेज़ी से बढ़ रहा है।







