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चपरासी के फर्जी दस्तावेजों पर खड़ी की फार्मा कंपनी, मिला 1.5 करोड़ का IT नोटिस

कोर्ट में जीती लंबी लड़ाई

मुंबई। नौकरी, बैंकिंग और अन्य औपचारिकताओं के लिए अक्सर दिए जाने वाले केवाईसी दस्तावेज पहचान के गलत इस्तेमाल का जरिया बन सकते हैं। इसकी वजह से आम नागरिकों को ऐसे लेन-देन के लिए आयकर विभाग की मांगों का सामना करना पड़ सकता है, जो उन्होंने कभी किए ही नहीं थे। इसी तरह के मामले में मुंबई के एक चपरासी ने कानूनी लड़ाई जीती है।

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने उसके खिलाफ की गई एक रीअसेसमेंट (पुनः मूल्यांकन) प्रक्रिया को रद कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत उस पर लगभग 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय थोप दी गई थी, जो एक फार्मास्युटिकल कंपनी से जुड़े लेन-देन से संबंधित थी। इस मामले में करदाता वाघेला ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व नियोक्ता मेहता ने उनकी जानकारी के बिना उनके हस्ताक्षर और केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग करके उनके नाम पर एक दूसरा पैन कार्ड बनवाया और किंग्सी फार्मा नाम की कंपनी खड़ी कर दी।

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