नई दिल्ली । रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और प्रक्षेपकों की खरीद के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपये का करार किया है। यह करार सोमवार को नई दिल्ली में हुआ।
ब्रह्मोस का किन देशों को हो रहा निर्यात?
यह हथियार प्रणाली लंबी दूरी से जमीन और समुद्र में स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। यह सुपरसोनिक गति से बेहद सटीक हमला कर सकती है। इससे पहले एक अक्तूबर को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि ब्रह्मोस भारत की उभरती रक्षा निर्यात क्षमता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा था कि ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया था कि दक्षिण पूर्व एशिया के तीन देशों को इस उन्नत रणनीतिक प्रणाली की बिक्री के लिए करार या समझौते हैं। इनमें इंडोनेशिया और वियतनाम भी शामिल हैं। राजेश कुमार सिंह ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि ब्रह्मोस का हवाई संस्करण भी मौजूद है और सुखोई लड़ाकू विमानों पर इसका इस्तेमाल सफल रहा है।
स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक है ब्रह्मोस
उन्होंने बताया था कि करीब 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली फिलीपींस को दी जा चुकी है। रक्षा सचिव ने कहा था कि वियतनाम के लिए शुरुआती निर्यात करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर और इंडोनेशिया के लिए करीब 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होना चाहिए।







