Harish Rana Euthanasia: गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद उन्हें भावुक माहौल में अंतिम विदाई दी गई। ब्रह्मकुमारी की लवली दीदी ने माथे पर तिलक लगाकर कहा—“सबको माफ करते हुए सो जाओ”. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गाजियाबाद के साहिबाबाद में रहने वाले हरीश राणा की कहानी ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। करीब 13 साल तक बिस्तर पर दर्द भरी जिंदगी जीने के बाद अब उन्हें अंतिम विदाई दी गई। परिजन और जानने वाले लोग नम आंखों से उन्हें याद कर रहे हैं। साहिबाबाद के मोहन नगर स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र से बहन कुमारी लवली दीदी भी हरीश के घर पहुंचीं और उन्हें आध्यात्मिक तरीके से अंतिम विदाई दी। उन्होंने कहा कि सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए सो जाओ..ठीक है..। बीके लवली ने बताया कि उन्होंने हरीश के लिए मेडिटेशन भी किया। साथ ही उसे शांति से अंतिम विदाई दी। हरीश के माता-पिता को भी ढांढस बंधाया।
सोशल मीडिया पर एक 22 सेकेंड का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बेड पर पड़े हरीश राणा को एक महिला चंदन का टीका लगाती हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान है। इस मुस्कान के पीछे का दर्द साफ दिखता है। वह बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ सहलाते हुए कहती हैं, सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए सो जाओ। आखिरी विदाई का यह वीडियो पत्थरदिल लोगों की आंखों में भी आंसू लाने वाला है। एक युवक के साथ ऐसा हादसा हुआ, जिसने उसके माता-पिता के सपनों को तोड़ दिया। उसे बिस्तर पर सिमटने को मजबूर कर दिया। ऐसे में युवक के लिए मौत ही आखिरी विकल्प बचा। एक युवक जिससे उम्मीदें थी कि वह बुढ़ापे में मां-पिता का सहारा बनेगा। बॉडीबिल्डर हरीश ऐसी स्थिति में पहुंच गया, जहां वह आंखों को झपकाने के अलावा शरीर के एक अंग को भी हिला-डुला नहीं सकता था। इस कारण माता-पिता को हरीश के लिए मौत मांगनी पड़ी।
दरअसल, 20 अगस्त 2013 को हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर में चोटें आईं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उनके ठीक न होने की बात कही। माता-पिता ने ठीक करने के लिए कई जगहों पर इलाज कराया। इलाज सफल नहीं होने के बाद इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मेडिकल बोर्ड की सलाह पर अनुमति दे दी।







