कोरबा। लकड़ी तस्करों ने वनकर्मियों को बंधक बनाकर मारपीट की। इस दौरान मोबाइल लूटने के साथ ही कर्मियों को जान से मारने का प्रयास भी किया। मामले में छग वन कर्मचारी संघ सामने आ गया है। संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक व डीएफओ को पत्र लिखकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनकी गिरफ्तारी नही होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
घटना करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम जोगीपाली में 14 नवंबर की रात घटित हुई थी। रामपुर के आसपास जंगल में 38 हाथियों का झुंड डेरा डाला था, जिसकी निगरानी के लिए सहायक वन परिक्षेत्राधिकारी चमरू सिंह कंवर व बीट गार्ड गजाधर सिंह राठिया गए हुए थे। उन्हें पेट्रोलिंग के दौरान कक्ष क्रमांक OA 1464 मुड़धोवा पतरा जंगल से साल की लकड़ी का तस्करी किए जाने की सूचना मिली। वे तस्करों की तलाश में मौके पर पहुंचे। इस दौरान जोगीपाली निवासी अंकुश पटेल व मना राम पटेल ट्रैक्टर में साल का लट्ठा ले जाते मिले। उनके साथ करीब एक दर्जन लोग भी थे। उन्होंने वनकर्मियों से मारपीट की। उनका मोबाइल लूटकर जबरिया गांव ले गए, जहां वनकर्मियों पर लाठी डंडे से हमलाकर घायल कर दिया। उनकी कुल्हाड़ी से हत्या की कोशिश की गई।
किसी तरह जान बचाकर भागे वनकर्मियों ने मामले की शिकायत करतला थाना पहुंचकर की। मामले में पुलिस ने करीब एक दर्जन तस्करों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर लिया, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और न ही कार्रवाई आगे बढ़ी। यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद वनकर्मी लामबंद हो गए थे। अब कर्मचारियों के हित और न्याय के लिए छग वन कर्मचारी संघ भी सामने आ गया है।
मंगलवार को संभागीय अध्यक्ष प्रीतम पुराइन व जिलाध्यक्ष कमलेश कुम्हार की मौजूदगी में कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में साथी कर्मचारियों के साथ हुई वारदात को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान एकस्वर से सभी ने पीड़ित कर्मचारियों को न्याय दिलाने की बात कहीं। इसके लिए विभागीय व पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। संभागीय व जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी व सदस्य डीएफओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएफओ प्रेमलता यादव को ज्ञापन सौंपा। तत्पश्चात पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, जहां पुलिस अधीक्षक के नाम डीएसपी मुख्यालय को ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में माध्यम से वनकर्मियों के साथ वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। यदि शीघ्र गिरफ्तारी नही होती है, तो उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है, जिसकी सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन के होने का उल्लेख किया गया है।
रात में ही पीड़ित वनकर्मी पहुंचे थे थाने- बताया जा रहा है कि घटना के बाद पीड़ित वनकर्मियों को विभागीय अधिकारी से किसी तरह का सहयोग नही मिला। वे किसी तरह अपनी जान बचाकर रात लगभग तीन बजे थाना पहुंचे, जहां मौजूद पुलिसकर्मी ने उन्हें सुबह आने की बात कहकर लौटा दिया। 15 नवंबर की सुबह साथी वनकर्मियों को घटना की जानकारी हुई। वे संघ के पदाधिकारियो के साथ थाने पहुंचे, तब कहीं जाकर एफआईआर दर्ज हो सका। इस घटना के बाद वन कर्मियों में भारी आक्रोश और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। गिरफ्तारी नही होने पर आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करने की बात कही जा रही है।







