मुंबई। मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान करीब 15,000 लोगों को जहर देने की कथित साजिश रचने के मामले में पुणे निवासी 39 वर्षीय फैयाज प्रेमजी के खिलाफ मझगांव कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने ही समुदाय के कुछ लोगों से नाराज था और इसी रंजिश के चलते उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई थी। फिलहाल आरोपी आर्थर रोड जेल में बंद है और पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र में 30 से अधिक गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि बीबीए डिग्री धारक और पुणे में पेंट निर्माण का कारोबार करने वाले फैयाज प्रेमजी ने 50 किलोग्राम से अधिक जिंक फॉस्फाइड खरीदा था, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चूहों को मारने वाले जहर के रूप में किया जाता है।
अपराध को अंजाम देने से पहले वह डोंगरी स्थित एक लॉज में लगभग दो सप्ताह तक रुका हुआ था। इसी दौरान उसने 30000 खाली कैप्सूल मंगाए और अपने कमरे में ही 15000 से अधिक जहरीले कैप्सूल तैयार किए, जिनमें से पुलिस ने छापेमारी के दौरान 14900 कैप्सूल बरामद कर लिए थे। आरोपी ने 26 जून को मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोगों को इन जहरीले कैप्सूलों को पेनकिलर और इम्युनिटी बूस्टर बताकर बांटना शुरू कर दिया। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि मुहर्रम में मातम के दौरान होने वाले दर्द से राहत दिलाने के लिए वह ये गोलियां दे रहा था।
जुलूस में शामिल 26 वर्षीय सलमान सईद ने एक कैप्सूल खा लिया, जिसके तुरंत बाद उसे उल्टी और बेचैनी होने लगी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जुलूस के बंदोबस्त में तैनात पुलिस कर्मियों ने फैयाज को संदिग्ध रूप से कैप्सूल बांटते देख लिया और उसे ज्यादा गोलियां बांटने से पहले ही मौके पर हिरासत में ले लिया।
पुलिस का मानना है कि कम से कम 10 लोगों ने ये गोलियां खाई थीं, लेकिन जहर के लक्षण दिखने पर सिर्फ दो लोग ही औपचारिक शिकायत लेकर सामने आए। आशंका है कि अन्य लोगों ने भी गोलियां खाई होंगी और समय रहते निजी स्तर पर इलाज करा लिया होगा। बरामद कैप्सूलों को रासायनिक जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है, जिसकी प्रारंभिक जांच में जिंक फॉस्फाइड की पुष्टि हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की जाएगी। जांच अधिकारी के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी काफी परेशान दिखा और उसने आरोप लगाया कि उसके अपने खोजा शिया समुदाय के कुछ लोगों ने उसका जीवन बेहद मुश्किल बना दिया था, जिसके चलते उसने गुस्से में आकर यह कदम उठाया।







