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छत्तीसगढ़

भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप घोटाला : अब CBI संभालेगी कमान, अब तक 21 आरोपी गिरफ्तार

भिलाई स्टील प्लांट से करोड़ों रुपये के लौह-स्क्रैप चोरी मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने के लिए सहमति दे दी है। 25 सितंबर को जारी राजपत्र में इसका उल्लेख किया गया है।

राज्य सरकार की सहमति के बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी के दायरे में आ गई है। इस मामले में पुलिस पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुकी है और 21 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है। इनमें रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह भी शामिल हैं।
250 टन स्क्रैप बरामद होने के बाद खुला मामला :  मामला 26 मई 2026 को सामने आया था, जब पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह खदानपारा स्थित ए.के. ट्रेडर्स से पुलिस ने बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप बरामद किया था। पुलिस के मुताबिक बरामद स्क्रैप की मात्रा करीब 250 टन थी। इसके साथ ही स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल किए जा रहे हाईवा, ट्रक, क्रेन, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसमें करीब 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल था।
जांच में सामने आया स्क्रैप खपाने का नेटवर्क :  जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने संजय सिंह को मामले का मुख्य आरोपी बताया था। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को यह जानकारी मिली कि स्टील प्लांट से चोरी किया गया स्क्रैप बाहर निकालकर फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों के जरिए आगे भेजा जाता था।

जांच में रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड में चोरी के स्क्रैप को खपाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था।

अब तक 21 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक मामले में अब तक 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में स्टील प्लांट के भीतर और बाहर सक्रिय नेटवर्क, स्क्रैप की ढुलाई और उसे निजी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की भूमिका की पड़ताल की गई है। मामले में आगे भी अन्य लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।

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