नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी में स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है, तब भी वह राशन जैसी बुनियादी सरकारी सुविधाओं का हकदार बना रहेगा।
अदालत ने साफ किया कि मतदाता सूची से नाम हटने मात्र से किसी भी नागरिक को अन्य वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट की मुख्य बातें और निर्देश:-
सरकारी लाभों पर रोक नहीं: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटना और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना दो अलग बातें हैं। नाम हटने के बाद भी नागरिक राशन व अन्य सरकारी सुविधाओं के हकदार बने रहेंगे।
त्वरित फैसले का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की अपील पर संभव हो तो दो महीने के भीतर उचित फैसला लिया जाए।
हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले में उचित और त्वरित राहत कलकत्ता हाई कोर्ट से मिल सकती है। अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट दी है।
क्या था पूरा मामला?
यह सुनवाई पश्चिम बंगाल के निवासी मोहिबुल्ला मंडल की याचिका पर हो रही थी। याचिकाकर्ता को डर था कि राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक आदेश के आधार पर उनका राशन कार्ड रद्द या निलंबित किया जा सकता है। उन्होंने मांग की थी कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर उनकी अपील पर जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उन्हें सब्सिडी वाला राशन मिलता रहे।







