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उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब सेना को बदनाम करना नहीं

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने रायबरेली से कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भारतीय सेना पर टिप्पणी करने पर आड़े हाथ लिया और जारी समन के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी को भी सेना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने की आजादी नहीं देती।

कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया कथित बयान निसंदेह स्वाद में अच्छा नहीं है। सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति से यह अपेछित होता है कि वह जनता में भाषण देते समय संयम का स्तर बनाए रखे। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज भी कर दिया, जिसमें उन्होंने लखनऊ की एक एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा मानहानि मामले में फरवरी 2025 में जारी समन आदेश को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान में बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निश्चित रूप से दी गई है, लेकिन यह तर्कसंगत प्रतिबंधों के अधीन है। इसमें किसी व्यक्ति या भारतीय सेना के खिलाफ अपमानजनक बयान देने की स्वतंत्रता शामिल नहीं है।

यह मानहानि की शिकायत बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने दायर की थी। यह मामला फिलहाल लखनऊ की एक अदालत में लंबित है। शिकायत में दावा किया गया कि राहुल गांधी ने 16 दिसंबर 2022 को अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी 9 दिसंबर 2022 को भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई झड़प से जुड़ी थी। शिकायत के अनुसार कि राहुल ने बार-बार अपमानजनक तरीके से कहा था कि चीन की सेना अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों को पीट रही है और भारतीय प्रेस इस संबंध में कोई सवाल नहीं पूछेगा। लखनऊ की अदालत ने पहली नजर में माना था कि राहुल के बयान से भारतीय सेना और उससे जुड़े लोगों और उनके परिवारों का मनोबल कम हुआ है। इस मामले में अदालत ने राहुल को पेश होने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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