Diwali festival 2025 : दिवाली त्यौहार की शुरूआत धनतेरस के दिन से होती है। इस दिन लोग नई चीजें खरीदकर घर में समृद्धि और शुभता लाने का प्रयास करते हैं। खासकर धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा बहुत पुरानी है। इस दिन खरीदे गए बर्तनों को अमृत कलश के समान माना जाता है। यह परंपरा धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर कौन-से बर्तन खरीदना शुभ होता है और किनसे परहेज करना चाहिए? आइए जानते हैं इसका महत्व और कब इन बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है।
बर्तन खरीदने के पीछे है धार्मिक कथा- धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरि अमृत से भरा पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे। तभी से इस दिन पीतल, तांबा और कांसे के कलश या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। यह परंपरा समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है।
धनतेरस पर कौन-से बर्तन खरीदना है शुभ- धनतेरस के दिन पीतल, तांबे और कांसे के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना गया है। इन धातुओं से बने बर्तन घर में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और धन वृद्धि का योग बनाते हैं। अगर आप सोना या चांदी खरीदने में असमर्थ हैं, तो पीतल का बर्तन खरीदना भी फलदायी माना गया है।
सोना खरीदने का महत्व- धनतेरस पर सोने से बनी चीजें जैसे सोने के सिक्के या फिर गहने खरीदना काफी शुभ माना जाता है, जिसका कारण यह है कि हिंदू धर्म में सोने को शुद्धता और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि धनतेरस पर सोना खरीदने से व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही उसे मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है।
किन बर्तनों की खरीद से करें परहेज? – ऐसा कहा जाता है कि धनतेरस के दिन लोहे, स्टील, प्लास्टिक या काली मिट्टी से बने बर्तन नहीं खरीदने चाहिए। जानकारी के अभाव में लोग खरीददारी के नाम पर कुछ भी खरीदकर ले आते हैं। ज्योतिष के अनुसार, ये वस्तुएं अशुभ मानी जाती हैं और इनसे घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है।
धनतेरस पर खरीदे गए बर्तनों का इस्तेमाल कब करें? – धनतेरस पर खरीदे गए बर्तनों का तुरंत उपयोग नहीं करना चाहिए। इन्हें पहले पूजा के स्थान पर रखें और फिर भगवान धनवंतरि व माता लक्ष्मी की आराधना करने का विधान बताया गया है। दीपावली के दिन या उसके बाद किसी शुभ मुहूर्त में इनका पहला प्रयोग करना सबसे शुभ माना गया है।
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







