नवरात्रि में माता रानी के सिद्ध मंत्रों और श्लोकों का जाप करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इन नौ दिनों में पूरी श्रद्धा से माता के किसी भी मंत्र या श्लोक का जाप करता है उसके कष्टों का निवारण हो जाता है।
इस दौरान आप ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥’ और ॐ दुं दुर्गायै नमः समेत माता रानी के कई मंत्रों और श्लोकों का जाप कर सकते हैं। बता दें इस बार नवरात्रि पर्व 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक रहेगा। चलिए अब जानते हैं देवी दुर्गा के प्रसिद्ध श्लोक और मंत्र।
नवरात्रि 2026 माता रानी के मंत्र
- दुर्गा बीज मन्त्र – ॐ दुं दुर्गायै नमः।
- दुर्गा नवार्ण मन्त्र – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
- दुर्गा गायत्री मन्त्र – ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
- दुर्गा अष्टाक्षर मन्त्र – ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।
देवी दुर्गा ध्यान मन्त्र
ॐ जटा-जूट-समायुक्तमर्धेन्दु-कृत-लक्षणाम्।
लोचनत्रय-संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम्॥
नवरात्रि पूजा के मंत्र दिन के अनुसार
- मां शैलपुत्री का मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
- मां चन्द्रघण्टा का मंत्र- ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः
- देवी कूष्माण्डा का मंत्र – ॐ कूष्माण्डायै नमः
- देवी स्कंदमाता का मंत्र – ॐ स्कन्दमात्राय नमः
- देवी कात्यायनी का मंत्र – ॐ कात्यायनै नमः
- देवी कालरात्रि का मंत्र – ॐ कालरात्र्यै नमः
- देवी महागौरी का मंत्र – ॐ महागौर्यै नमः
- देवी सिद्धिदात्री का मंत्र- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
माता के मंत्र
- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
- शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
नवरात्रि में मंत्र जाप की सही विधि
- प्रातःकाल के समय या संध्या के समय मंत्र जाप करना सबसे उत्तम होता है।
- मंत्र जाप किसी आसन पर बैठकर करना चाहिए।
- जाप के लिए आप कमलगट्टे की माला या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग कर सकते हैं।
- मंत्र जाप करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







