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नवरात्रि का तीसरा दिन कल : करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें भोग, आरती और मंत्र

शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा के तीसरे रूप में जानी जाती हैं। मां के मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, उनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है और मां के दस हाथ हैं, जिनमें अलग-अलग अस्त्र और शस्त्र होते हैं। चंद्रघंटा माता शेर पर सवार होती हैं।

साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है। इस साल शारदीय नवरात्रि में तीसरा व्रत दो दिन रखा जाएगा यानि मां चंद्रघंटा की आराधना आप दो दिन तक करेंगे।

मान्यताओं के अनुसार, चंद्रघंटा माता की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति, सुख, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त पूरे भक्ति भाव से चंद्रघंटा माता की पूजा-अर्चना कर, उनके नाम का उपवास रखते हैं. उनकी आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से पढ़कर चंद्रघंटा माता की आरती कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा पूजा विधि

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे : सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहने।
  2. इसके बाद पूजा में मां को लाल और पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें ।
  3. इसके बाद मां को कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
  4. फिर मां चंद्रघंटा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करें।
  5. मां चंद्रघंटा को पीले रंग की मिठाई और दूध से बनी खीर का भोग अर्पित करें।
  6. पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें।
  7. साथ ही दुर्गा सप्तशती और अंत में मां चंद्रघंटा की आरती का पाठ भी करें।
  8. इन सभी विधियों को विधिपूर्वक करने से मां चंद्रघंटा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग- नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में खीर का भोग अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है। मां को विशेष रूप से केसर की खीर बहुत पसंद है। इसके अतिरिक्त, आप लौंग, इलायची, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाइयां भी मां को भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं। भोग में मिसरी जरूर रखें और साथ ही पेड़े भी चढ़ा सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।

कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।

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