रायपुर। मांस के विज्ञापनों पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर PETA इंडिया ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। संगठन का कहना है कि मांस के विज्ञापनों पर भी शराब और तंबाकू जैसे उत्पादों की तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
PETA इंडिया की वेगन एंड कॉरपोरेट प्रोजेक्ट्स की सीनियर मैनेजर डॉ. किरण आहूजा ने कहा कि संगठन मांस के सेवन पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहा है। उनकी मांग केवल मांस उत्पादों के प्रचार और विज्ञापन को प्रतिबंधित करने की है। उन्होंने कहा कि सरकारें शराब और तंबाकू जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले उत्पादों के विज्ञापनों पर पहले से कई तरह की पाबंदियां लगाती हैं। इसी तरह PETA का मानना है कि मांस के विज्ञापनों को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का दिया हवाला : डॉ. आहूजा ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का हवाला देते हुए कहा कि डेयरी, अंडा, मांस और चमड़ा उद्योगों सहित पशुधन से जुड़े क्षेत्र मानव गतिविधियों से होने वाले कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 14.5 प्रतिशत योगदान देते हैं। उन्होंने मांस उत्पादन में पशुओं के साथ होने वाली हिंसा का भी मुद्दा उठाया। PETA का आरोप है कि मांस उद्योग विज्ञापनों में उत्पादन प्रक्रिया के इन पहलुओं और इसके प्रभावों की जानकारी उपभोक्ताओं को नहीं देता।
उपभोक्ताओं को मिले पूरी जानकारी : PETA इंडिया का कहना है कि यदि मांस उद्योग पूरी तरह पारदर्शी तरीके से काम करे तो उसके विज्ञापनों में पर्यावरणीय प्रभाव और पशु कल्याण से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखना चाहिए। डॉ. आहूजा ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग मांस के सेवन पर प्रतिबंध लगाने की नहीं है, बल्कि मांस उत्पादों के प्रचार और विज्ञापन को नियंत्रित करने से जुड़ी है।