रायपुर। हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार पूरे देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। राजधानी रायपुर में रावण दहन के दौरान विशालकाय दशानन के सामने ट्रेनों की रफ्तार थम जाती है या यूं कहें की ट्रेनें रेंगती हुई चलती है। जरूरत पड़ने पर ट्रेनें खड़ी भी हो जाती हैं। भले ही यह बात आपके गले न उतर रही हो पर यहां ऐसा नजारा देखने को मिलता है। रेल यात्री भी रावण दहन को देखते हैं। दशहरे मेले का आनंद लेते हैं।
101 फीट का रावण का पुतला होगा दहन : इस बार यहां पर 101 फीट ऊंचे गगनचुंबी रावण का दहन होगा। दरअसल दशहरा मैदान के किनारे ही रेलवे ट्रैक है। रावण दहन के दौरान इन पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों का पहिया थम जाता है। जब मैदान में जलते हुए तीरों से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों को अग्नि दी जाती है, तो आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी और बारूद के धमाकों से गूंज उठता है।
ट्रेन की खिड़की बन जाती है वीआईपी बॉक्स
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खूबसूरत पल यात्रियों के लिए होता है, जो उस वक्त संयोग से या पहली बार ट्रेन से सफर कर रहे होते हैं। यहां पर जैसे ही ट्रेन की रफ्तार धीमी होती है। यात्रियों के लिए सफर की थकान पलभर में गायब हो जाती है। बिना किसी पास या टिकट के ट्रेन की खिड़की ही उनके लिए वीआईपी बॉक्स की तरह बन जाता है। इन खिड़कियों से वे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और भव्य रावण दहन का दीदार करते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खूबसूरत पल यात्रियों के लिए होता है, जो उस वक्त संयोग से या पहली बार ट्रेन से सफर कर रहे होते हैं। यहां पर जैसे ही ट्रेन की रफ्तार धीमी होती है। यात्रियों के लिए सफर की थकान पलभर में गायब हो जाती है। बिना किसी पास या टिकट के ट्रेन की खिड़की ही उनके लिए वीआईपी बॉक्स की तरह बन जाता है। इन खिड़कियों से वे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और भव्य रावण दहन का दीदार करते हैं।
अलर्ट रहता है रेलवे प्रशासन
हालांकि रेलवे प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर अलर्ट रहता है। पुतला दहन के मुख्य समय (पीक ऑवर्स) में यहां से गुजरने वाली ट्रेनों को या तो आउटर पर रोक दिया जाता है या फिर उनकी स्पीड को बेहद धीमा कर दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोको पायलट ट्रेन रोक भी सकते हैं। इसके लिये उन्हें इजाजत रहती है। ताकि किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सके।
हालांकि रेलवे प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर अलर्ट रहता है। पुतला दहन के मुख्य समय (पीक ऑवर्स) में यहां से गुजरने वाली ट्रेनों को या तो आउटर पर रोक दिया जाता है या फिर उनकी स्पीड को बेहद धीमा कर दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोको पायलट ट्रेन रोक भी सकते हैं। इसके लिये उन्हें इजाजत रहती है। ताकि किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सके।







