भुवनेश्वर। भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम बनाने वाली कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम ने ओडिशा की शानदार हथकरघा (handloom) परंपराओं को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया। कंपनी ने ‘भुवनेश्वर टाइम्स फैशन वीक 2026’ के दौरान अपने महिला-केंद्रित हथकरघा प्रोजेक्ट, ‘वेदसुता’ (VedSuta) की कारीगरी को सबके सामने पेश किया।
एक फैशन हाउस के साथ मिलकर, वेदसुता की कारीगरों द्वारा बनाई गई पारंपरिक संबलपुरी साड़ियों को रनवे के लिए आधुनिक डिज़ाइनर कपड़ों में बदला गया। इस इवेंट में इस पहल से जुड़ी महिला लाभार्थियों ने भी गर्व के साथ अपनी बनाई हुई टेक्सटाइल रचनाओं को प्रदर्शित किया, जिससे उन कुशल कारीगरों को पहचान मिली जिन्होंने ये बारीक डिज़ाइन तैयार किए थे।
इस कलेक्शन में संबलपुरी टेक्सटाइल के अनोखे मोटिफ़ (डिज़ाइन), चटख रंग और जटिल बुनाई तकनीकों को समकालीन स्टाइल के साथ बखूबी मिलाया गया। क्लासिक साड़ियों से लेकर आधुनिक अंदाज़ तक, इस शो ने ओडिशा की हथकरघा विरासत की अनुकूलन क्षमता और आज की फैशन की दुनिया में इसके बढ़ते महत्व को दिखाया।
खास बात यह है कि इस इवेंट ने महिला कारीगरों को फैशन के शौकीनों, इंडस्ट्री के जानकारों और संभावित खरीदारों जैसे बड़े दर्शकों के सामने अपनी कारीगरी दिखाने का मंच दिया।
इवेंट के दौरान, वेदांता एल्युमीनियम के CEO, सी. चंद्रू ने कहा, “ओडिशा की पारंपरिक कलाओं में पीढ़ियों से चली आ रही कुशलता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समझ समाई हुई है। वेदसुता जैसी पहलों के ज़रिए, हम महिला कारीगरों के लिए इस विरासत को बचाते हुए टिकाऊ आजीविका बनाने के अवसर पैदा कर रहे हैं। भुवनेश्वर टाइम्स फैशन वीक में उनकी भागीदारी उस क्षमता को उजागर करती है जो तब सामने आती है जब ज़मीनी स्तर के उद्यमों को बड़े मंच मिलते हैं। हम महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों का समर्थन करने और स्थानीय कलाओं को बड़े बाज़ारों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
रघुनाथपल्ली की कारीगर रिंकी मेहर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम अपने घरों और समुदायों में संबलपुरी साड़ियों की बुनाई होते हुए देखकर बड़े हुए हैं। अपने काम को शानदार डिज़ाइनर कपड़ों में बदलते और फैशन शो में प्रदर्शित होते देखना हमारे लिए बहुत गर्व का पल था। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि जिन कौशलों को हमने सालों तक निखारा है, वे हमें ऐसे अवसरों तक ले जा सकते हैं जिनकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।” ‘वेदसुता’ (VedSuta), 2008 में शुरू हुई ‘शुभलक्ष्मी कोऑपरेटिव’ के बड़े आजीविका विकास कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है। अभी यह कोऑपरेटिव झारसुगुड़ा के 106 गांवों में 510 स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी 5,500 से ज़्यादा महिलाओं की मदद करती है। यह वित्तीय समावेश, उद्यमिता, कौशल विकास और बाज़ार तक पहुँच को बढ़ावा देती है। हथकरघा (handloom) कपड़ों, टेराकोटा शिल्प, जूट के उत्पादों और अन्य ग्रामीण व्यवसायों से जुड़ी पहलों के ज़रिए, यह कोऑपरेटिव स्थानीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को लगातार बढ़ा रही है।
फ़ैशन शो से कहीं आगे, यह कार्यक्रम ग्रामीण उद्यमिता को मज़बूत करने, पारंपरिक शिल्प कौशल को बचाने और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने के प्रति वेदांता एल्युमीनियम की प्रतिबद्धता को दिखाता है। वित्त वर्ष 2026 में, झारसुगुड़ा में कंपनी के सामुदायिक विकास प्रयासों ने 61 गांवों में 7,00,000 से ज़्यादा लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर डाला। इन प्रयासों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया।
ज़मीनी स्तर के व्यवसायों को उभरते बाज़ारों और मुख्यधारा के प्लेटफ़ॉर्म से जोड़कर, वेदांता एल्युमीनियम भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न में सक्रिय रूप से योगदान दे रही है। इस विज़न में पारंपरिक कौशल, महिलाओं के नेतृत्व वाली पहल और स्थानीय समुदाय देश के विकास की कहानी के लिए बहुत ज़रूरी हैं।







