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त्यौहारी सीजन में दुकानदारों को बड़ी राहत : दिवाली तक नहीं लगेगा UPI पर चार्ज

त्यौहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने दुकानदारों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने यूपीआई पर एमडीआर की समय सीमा बढ़ा दी है। अब तय शुल्क आने वाले दिवाली के बाद ही लगाया जाएगा। पिछले दिनों खबर आई थी कि 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार ने अब स्थिति स्पष्ट कर दी है।

जारी किया गया आदेश :  एनपीसीआई की तरफ से मंगलवार 13 अक्टूबर को जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दिवाली तक कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू नहीं होगा। यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने तय किया कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पीटूएम) लेनदेन पर यह शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसे लागू करने की सटीक तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।
MDR ढांचा क्या है और किस लेन-देन पर कितना शुल्क लगेगा?
  • एनपीसीआई के अनुसार, 2,000 रुपये तक के छोटे P2M लेन-देन पर 0% MDR (शून्य शुल्क) बना रहेगा, जो कुल P2M लेन-देन की मात्रा का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
  • सामान्य वाणिज्यिक P2M लेन-देन: ₹2,000 से अधिक के P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत का बेसलाइन एमडीआर लागू होगा।
  • अधिकतम सीमा: ₹75,000 या उससे अधिक के बड़े भुगतानों पर एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन तय की गई है।
  • पूंजी बाजार लेन-देन: म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर्स को किए जाने वाले हस्तांतरण पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर (अधिकतम ₹300) लागू होगा।

कब से लगना था एमडीआर?
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई से जुड़े लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की तारीख पहले 15 अक्टूबर थी। लेकिन अब सरकार ने इसे आगे बढ़ा दिया है।

व्यापारी लगातार कर रहे एमडीआर का विरोध
सरकार के यूपीआई पर एमडीआर लगाने के फैसले का व्यापारी शुरू से विरोध कर रहे थे। कई शहरों में तो व्यापारियों ने एमडीआर के विरोध में “नो यूपीआई डे” का भी आयोजन किया और तर्क दिया कि सरकार के इस कदम से उन्हें आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ेगा और इसका असर उनकी आमदनी और मुनाफे पर होगा।

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