दुर्ग। एक एमटेक इंजीनियर से ऑनलाईन ठगी की गई है। केवायसी अपडेट करने के लिए इंजीनियर को लिंक भेजा गया और टच करते ही खाते से रकम पार कर दिया गया। मामला जब दुर्ग एसपी के संज्ञान में आया तो उन्होंने पीड़ित को पुलिस कंट्रोल रूम बुलाया और ठगी का लाइव डेमो किया। एमटेक इंजीनियर ने बताया की किस तरह तीन छोटी-छोटी गलती की वजह से उसके अकाउंट से 7-8 मिनट के अंदर लाखों रुपए निकल गए।तालपुरी ए-ब्लाक रुआबान्धा निवासी गौरव रॉय एमटेक इंजीनियर है। वह मारुती सुजुकी भाटागांव रायपुर में एडवाइजर है। उसने बताया कि वो काफी दिनों से अपने पैन कार्ड का केवायसी अपडेट करना चाह रहा था। 1 मई की दोपहर 2.30 उसके मोबाइल पर एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसबीआई का कर्मचारी बताते हुए कहा कि अगर उसका केवायसी अपडेट नहीं हुता तो उसका अकाउंट बंद हो जाएगा। इसके बाद उसने उसके नंबर पर एक लिंक भेजा और केवायसी अपडेट करने के लिए कहा। गौरव ने जल्दबाजी में केवायसी अपडेट करने के लिए उस लिंक को टच किया। लिंक खोलने के बाद पहले उसका पैन कार्ड नंबर मांगा और फिर ओटीपी। इसके बाद आधार कार्ड नंबर और उसका ओटीपी। ओटीपी बताते ही फोन काट दिया गया। थोड़ी देर बाद गौरव के मोबाइल पर मैसेज आया कि उसके खाते से 2.25 लाख निकाला गया है। इंजीनियर ने तत्काल मामले की शिकायत भिलाई नगर थाने में दर्ज कराई। गौरव ने बताया कि वह छोटी सी गल्ती की वजह से साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ। उसने बताया कि जब उसने लिंक को खोला तो उसने उसे पढ़ा नहीं कि वो एसबीआई का है या उससे मिलता जुलता किसी और का लिंक है। दूसरी गलती उसने कॉल करने वाले को अपने फोन नंबर पर भेजे गए ओटीपी को बता दिया। तीसरी गलती जब वह वेबसाइट में जानकारी भर रहा था तब उसने वेबसाइट के हेडर नहीं देखा। यदि देख लेता तो यह पता चल जाता कि वेबसाइट एसबीआई की न होकर उससे मिलता जुलता किसी फ्रॉड की है।
महज 8 मिनट में निकाली दो साल की जमापूंजीगौरव रॉय ने बताया कि वह जॉब करता है। एक साइबर ठग ने उसके मन के डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर उसके साथ साइबर ठगी की। उसने उसके दो साल की जमापूंजी को महज 7-8 मिनट के अंदर निकाल लिया। उसने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
गूगल सर्च से ठग को पता चलती है आपकी कमजोरीदुर्ग एसपी ने बताया कि आप जिस भी चीज के बारे में गूगल में सर्च करते हैं उसका एक बैकअप फाइल गूगल के पास स्टोर होता है। उस डेटा को साइबर ठग खरीदते हैं और फिर सर्च हिस्ट्री के आधार पर पता करते हैं कि किस व्यक्ति को किस तरह की सर्विस की जरूरत है। उसके बाद वे उसे उसी काम के लिए फोन करके दबाव बनाते हैं और मदद की बात करके ऑनलाइन फ्रॉड करते हैं।







