जांजगीर-चांपा। जिले में कानून व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने को लेकर जिला पुलिस प्रशासन भले ही मुस्तैदी के दावे कर रहा हो, लेकिन नवागढ़ थाना क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जांजगीर-चांपा जिले के अधिकांश थानों में जुआ, सट्टा और अवैध धंधों पर ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई जारी है, वहीं नवागढ़ थाना क्षेत्र अकेला ऐसा इलाका बन चुका है जहां जगह-जगह जुए की महफिलें खुलेआम सज रही हैं और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है। यह दोहरा रवैया सीधे तौर पर नवागढ़ पुलिस की कार्यशैली और निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जब पूरे जिले में पुलिस कप्तान के निर्देश पर अभियान चलाकर असामाजिक तत्वों और जुआरियों को सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है, तब नवागढ़ पुलिस जुआ माफियाओं पर इतनी दरियादिल क्यों है? क्षेत्र के विभिन्न गांवों और सुनसान ठिकानों में लाखों के दांव खुलेआम लग रहे हैं, जिसकी जानकारी आम जनता तक को है, लेकिन क्या नवागढ़ पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है? या फिर कार्रवाई न होना किसी बड़े ‘सांठगांठ’ तो नहीं है?
प्रशिक्षु थानेदार के जाते ही बेलगाम हुए असामाजिक तत्व
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पूर्व में पदस्थ प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक, थानेदार के कार्यकाल के दौरान अवैध गतिविधियों पर लगाम कसी हुई थी और जुआरियों में पुलिस का खौफ साफ नजर आता था। उनके जाते ही नवागढ़ क्षेत्र में एक बार फिर जुए और सट्टे का जाल तेजी से फैल गया है। शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन थाने स्तर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
कार्रवाई के नाम पर केवल रस्म अदायगी या फिर आंखें मूंद लेने का यह रवैया आम जनता के भरोसे को चोट पहुंचा रहा है। यदि नवागढ़ पुलिस समय रहते कुंभकर्णी नींद से नहीं जागी और इन संगठित फड़ों पर कड़ा प्रहार नहीं किया, तो पुलिस की छवि पर लगा यह दाग और गहरा होगा।
अब देखना यह होगा कि इस दोहरे मापदंड और बढ़ती शिकायतों पर जिले के आला अधिकारी संज्ञान लेकर नवागढ़ थाना क्षेत्र में कब तक सख्त कार्रवाई का हंटर चलाते हैं।







