रात भर डटे रहे अभिभावक
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में बच्चों के भविष्य और स्कूल की मान्यता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए सोमवार देर रात तक विरोध प्रदर्शन किया। मामला इतना बढ़ गया कि स्कूल परिसर से शुरू हुआ हंगामा सिविल लाइन थाने होते हुए कलेक्टर बंगले के घेराव तक पहुंच गया।
विवाद की मुख्य जड़ः सीबीएसई के नाम पर सीजी बोर्ड का दबाव
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने दाखिले के समय और पूरे सत्र के दौरान बच्चों को सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाने का दावा किया था। इसी आधार पर अभिभावकों से भारी-भरकम फीस भी वसूली गई। विवाद तब शुरू हुआ जब स्कूल ने अचानक 5वीं और 8वीं के छात्रों पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजीबीएसई) की बोर्ड परीक्षा देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
प्रमुख बिंदु जो विवाद का कारण बनेः
फीस की वसूलीः अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई की सुविधाओं के नाम पर पैसे दिए, तो अब सीजी बोर्ड की परीक्षा क्यों?
परीक्षा का दोहरा बोझः शासन के निर्देशानुसार 5वीं-8वीं की बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं। अभिभावकों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर वार्षिक परीक्षाएं पहले ही हो चुकी हैं, अब दोबारा बोर्ड परीक्षा का दबाव गलत है।
मान्यता पर सवालः शहर में स्कूल की तीन शाखाएं (बहतराई, मिशन अस्पताल रोड और व्यापार विहार) संचालित हैं। अभिभावकों को अंदेशा है कि स्कूल के पास जरूरी सीबीएसई संबद्धता नहीं है।
देर रात तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा
सोमवार रात जब स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, तो नाराज अभिभावक भारी संख्या में स्कूल पहुंचे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। इसके बाद भी समाधान न निकलने पर अभिभावक कलेक्टर बंगले का घेराव करने पहुंच गए।
प्रशासन की ओर से एसडीएम मनीष साहू, एडिशनल एसपी पंकज पटेल और अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि स्कूल प्रबंधन से इस विषय पर जवाब-तलब किया जाएगा और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासन का रुख
“अभिभावकों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। स्कूल प्रबंधन से चर्चा कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जाएगी और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”
मनीष साहू, एसडीएम बिलासपुर
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद अभिभावक शांत हुए हैं, लेकिन बच्चों के प्रमाण पत्र और मान्यता को लेकर संशय अब भी बरकरार है।







