छत्तीसगढ़ के सभी मंदिर पॉलीथिनमुक्त होंगे। इस दिशा में कार्य भी शुरू हो गया है। हर श्रद्धालु को संकल्प लेना चाहिए कि वह मंदिर में पूजा सामग्री बिना पॉलीथिन के ही लाए। ये फैसला ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ की ओर से शनिवार को दूधाधारी सत्संग भवन मठपारा रायपुर में हुई बैठक में लिया गया। कार्यक्रम के अंत में मंदिरों के महंत, पुजारी और सदस्यों ने पॉलीथिनमुक्ति का संकल्प लिया।
इस दौरान दूधाधारी मठ के महंत राम सुंदर दास ने कहा कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं बल्कि समाज को दिशा देने का केंद्र भी हैं। जब मंदिर पॉलीथिनमुक्त होंगे तो समाज भी प्रेरित होगा। यह केवल सफाई का नहीं, बल्कि ‘संस्कार और संस्कृति की शुद्धता’ का भी अभियान है। ग्रीन आर्मी का यह प्रयास वास्तव में धर्म और पर्यावरण दोनों की रक्षा का संगम है।
ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे ने कहा कि हम पिछले आठ वर्षों से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वच्छता की दिशा में कार्यरत हैं। आज धार्मिक समुदाय के साथ यह ऐतिहासिक पहल छत्तीसगढ़ के मंदिरों को पॉलीथिन मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। जब धर्म और पर्यावरण एक साथ खड़े होते हैं, तो परिवर्तन निश्चित है।
संगठन के रायपुर जिला अध्यक्ष गुरदीप टुटेजा ने कहा कि आज का यह आयोजन हमारे मिशन को और मजबूत करेगा। मंदिरों से शुरू हुआ यह अभियान अब हर मोहल्ले और हर घर तक पहुँचेगा। हम सभी मंदिर समितियों के सहयोग से रायपुर को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम में व्हाइट विंग की अध्यक्ष निधि अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी इस अभियान में सबसे महत्वपूर्ण होगी। घरों से ही पॉलीथिन का प्रयोग बंद होगा, तभी मंदिर और समाज दोनों स्वच्छ बन सकेंगे।
व्हाइट विंग की सभी सदस्याएं इस मिशन को घर-घर तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। यह अभियान 16 चरणों में निरंतर रूप से व्हाइट विंग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। आगामी चरणों में व्यापारियों, सार्वजनिक भवनों, स्कूल-कॉलेजों, विभिन्न समाजों की समितियों, जनप्रतिनिधियों और शासकीय अधिकारियों की बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
प्रदेश मीडिया प्रभारी शशिकांत यदु ने कहा कि यह प्रयास जन-जागरण को नई ऊँचाई देगा। इस कार्यक्रम में 125 मंदिरों और मठों के पुजारी, महंत एवं धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए।







