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छत्तीसगढ़

70 साल पीछे चले गए : बासीन से जटगा तक खतरे की सवारी, बस कि छत पर हो रहा सफर

कोरबा -जटगा। ग्राम बेतलो क्षेत्र से गुजरने वाली बस जटगा तक के अपने सफर में बासीन, साशीन, बर्रा और घुमानीडांड जैसे गांवों से गुजरती है। यह आम दिनचर्या है, लेकिन मंगलवार को सप्ताहिक बाजार के चलते यह बस जरूरत से कहीं ज्यादा सवारियों से लदी नजर आती है। ग्रामीण छत तक बैठे दिखाई देते हैं, जिससे सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां ही नहीं उड़ती हैं, बल्कि दर्जनों लोगों की जान भी हर सप्ताह खतरे में पड़ जाती है। अगर कही बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा।

पिछले दो हफ्तों कि ये तस्वीरें अब सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल हो रही हैं, जो इस समस्या को उजागर कर रही हैं। स्थानीय जनपद सदस्य संतोष मराबी ने इस पर गहरी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि, “क्षेत्र संसाधनों से वंचित नहीं है, लेकिन बस मालिक और चालक अधिक मुनाफे के लालच में जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोग अपनी मोटरसाइकिल या दूसरे निजी साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, पर उन्हें सिर्फ बस पर ही निर्भर किया जा रहा है।

उन्होंने प्रशासन और पुलिस से अपील की है कि विशेष रूप से बाजार के दिनों में निगरानी बढ़ाई जाए और ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए।यदि पुलिस की सख्ती दिखे तो ना ही लोग छत पर सवार होंगे और ना ही नियमों की अवहेलना होगी। यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सिर्फ ग्रामीणों की मजबूरी है या फिर चालकों और बस मालिकों की ढिलाई? ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग पुराने जमाने पर चल रहे हैं, और यही कारण है कि बस चालकों को आरटीओ के नियम तोड़ने का ‘अवसर’ मिल जाता है। सवाल यह भी है कि जब इतने संसाधन हैं तो लोगों को सुरक्षित यात्रा के लिए प्रेरित क्यों नहीं किया जा रहा। बसों की नियमित निगरानी, आरटीओ नियमों का पालन और बाजार के दिनों में विशेष चेकिंग जैसे कदम उठाए जाएं तो स्थिति में सुधार आ सकता है।

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