किसानों को कटाई रोकने की सलाह
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चक्रवात अर्णब के असर से मौसम बदल गया है। बुधवार को हुई बारिश के बाद खेतों में पककर तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। किसानों को चिंता है कि लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की बालियों से दाने झड़ सकते हैं। खेतों में पानी भरने से भी फसल प्रभावित होने का खतरा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है।
कोरबा जिले में करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुसार, लगभग 43 प्रतिशत क्षेत्र में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है। ऐसे समय में बारिश होने से कटाई का काम प्रभावित हो रहा है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें भी उपज सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है, क्योंकि खुले में रखे धान के भीगने से नुकसान हो सकता है।
अगले दो से चार दिनों तक कटाई से बचने की सलाह
मौसम की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को धान, दलहन और तिलहन की पक चुकी फसलों की कटाई फिलहाल टालने की सलाह दी है। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, उन्हें कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित और सूखे स्थान पर पहुंचाने के लिए कहा गया है।
कृषि विभाग ने खेतों में पानी जमा नहीं होने देने पर भी जोर दिया है। किसानों को खेतों के मुहाने खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और नियमित रूप से फसलों की निगरानी करने की सलाह दी गई है। इससे जलभराव के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
सब्जियों और फलों की फसलों को भी खतरा
बारिश और तेज हवा का असर सब्जियों और फलदार पौधों पर भी पड़ सकता है। कृषि विभाग ने फूलगोभी, चुकंदर, खीरा और करेला जैसी रबी सब्जियों की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी है। लौकी और दूसरी बेल वाली सब्जियों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा देने को कहा गया है। जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस के सहारे सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। ओलावृष्टि की आशंका वाले क्षेत्रों में उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करने की बात भी कही गई है।
मौसम साफ होने के बाद ही दवाओं का करें छिड़काव
लगातार बारिश के कारण फसलों में कीट और बीमारियों की समस्या भी सामने आ सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसलों में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो मौसम साफ होने के बाद जरूरत के अनुसार कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करें। तिवरा या अलसी की उतेरा फसल लेने वाले किसान फिलहाल बुवाई टालें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें
खराब मौसम को देखते हुए पशुपालकों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें। उनके लिए पर्याप्त चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करें। बिजली गिरने की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
15 नवंबर से शुरू होनी है धान खरीदी
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है। ऐसे में फसल को मौसम से बचाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर बारिश से धान खराब होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर पंजीयन और रकबे में सुधार से जुड़े काम प्रभावित होने के कारण कुछ किसानों को धान बेचने में परेशानी की चिंता है। पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व संबंधी कामकाज भी प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
कृषि विभाग के सहायक संचालक डीपीएस कंवर के अनुसार, किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए सतर्क किया गया है। उन्हें कटी हुई फसल सूखे स्थान पर रखने और खेतों में अनावश्यक पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। मौसम में बदलाव को देखते हुए कृषि गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।







